डासना जेल में बंद नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेस-वे के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह को डासना जेल से कोर्ट में पेशी के लिए अदालत ने एंबुलेंस और व्हीलचेयर की मंजूरी दे दी है।
हालांकि इनका खर्च यादव सिंह को खुद ही वहन करना होगा। इसके साथ ही सीबीआई कोर्ट ने सीएमओ को निर्देशित किया है कि मेडिकल बोर्ड बनाकर इनके स्वास्थ्य की जांच की जाए और जल्द रिपोर्ट कोर्ट को उपलब्ध कराई जाए।
बता दें कि यादव सिंह ने खुद को हाईपरटेंशन और स्लिप डिस्क से ग्रस्त बताते हुए सीबीआई कोर्ट में अर्जी के माध्यम से गुहार लगाई थी कि डासना जेल से कोर्ट में पेशी के लिए उन्हें एंबुलेंस और व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाए।
यादव सिंह का कहना था कि वह मेदांता ग्लोबल हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड में इलाज करा चुके हैं। डासना जेल से कोर्ट में पेशी के दौरान उन्हें बंदी वाहन में लाया जाता है। ऐसे में सड़क में गड्ढों के चलते काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
यादव सिंह का कहना था कि‘बैकपेन’ की शिकायत अभी भी है और इसके नियमित मेडिकल चेकअप ट्रीटमेंट की आवश्यकता पड़ती है। इस अर्जी पर सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक बीके सिंह ने विरोध जताते हुए कहा था कि गिरफ्तारी के समय ही दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में यादव सिंह का मेडिकल कराया गया था। तब वह पूरी तरह से स्वस्थ थे। बहस पूरी होने पर कोर्ट ने पिछले दिनों फैसला सुरक्षित रख लिया था।
बुधवार को यादव सिंह की इस अर्जी का निस्तारण करते हुए सीबीआई विशेष न्यायाधीश एके झा ने आदेश दिया कि यादव सिंह पेशी के दौरान अपने निजी खर्च पर एंबुलेंस और व्हीलचेयर का प्रयोग कर सकता है।
फर्म पार्टनर वीके गोयल की जमानत अर्जी खारिज
गाजियाबाद। यादव सिंह प्रकरण में ही डासना जेल में बंद तिरुपति कंस्ट्रक्शन के मैनेजर/पार्टनर वीके गोयल की जमानत अर्जी सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दी। वीके गोयल ने 29 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष सरेंडर किया था।
इसके बाद से वह डासना जेल में बंद है। अंतरिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उसकी नियमित जमानत अर्जी कोर्ट में पेश की गई थी। कई तारीखों पर इस अर्जी पर डिफेंस और अभियोजन की बहस चली थी।
सोमवार को बहस पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश एके झा ने जमानत अर्जी पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को विशेष न्यायाधीश ने वीके गोयल की अर्जी को खारिज कर दिया।