वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए गाजियाबाद में प्रत्याशियों की घोषणा करने में समाजवादी पार्टी अन्य दलों से आगे निकल गई। गाजियाबाद की पांच विधानसभा सीटों में से दो पर बुधवार को सपा ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। लोनी विधानसभा से राशिद मलिक को मैदान में उतारा गया है जबकि मोदीनगर विधानसभा से सपा ने एक बार फिर रामआसरे शर्मा पर भरोसा जताया है।
विधानसभा सीट गाजियाबाद, साहिबाबाद और मुरादनगर पर फिलहाल प्रत्याशियों की घोषणा होना बाकी है। लोनी विधानसभा सीट से ईश्वर मावी का नाम सबसे आगे चल रहा था लेकिन फाइनल लिस्ट में उनकी जगह सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद मलिक को चुना गया। सपा में करीब 22 साल से सक्रिय राशिद मलिक 2004 से 2010 तक सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष रहे।
वर्ष 2011 से 2014 तक जिलाध्यक्ष रहे। पिछले दिनों राशिद मलिक का नाम साहिबाबाद विधानसभा सीट से और ईश्वर मावी का नाम लोनी विधानसभा सीट के लिए सामने आ रहा था। माना जा रहा है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने की वजह से राशिद मलिक के नाम पर मुहर लगी है। राशिद मलिक ने कहा कि लोनी सीट सपा का गढ़ रही है। आलाकमान ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरेंगे।
गठबंधन पर निर्णय के बाद घोषित होंगी साहिबाबाद-गाजियाबाद की सीटें
डेमो पिक
मोदीनगर विधानसभा से सपा ने एक बार फिर रामआसरे शर्मा पर भरोसा किया है। वर्ष 2012 में भी उन्होंने सपा के टिकट पर मोदीनगर विधानसभा से चुनाव लड़ा था। उनके नाम की घोषणा पहले ही हो चुकी थी, सिर्फ फाइनल लिस्ट का इंतजार था। रामआसारे वर्ष 1980 से मोदीनगर समेत मेरठ मंडल की राजनीति में सक्रिय हैं।
श्रमिक नेता के रूप में पहचान बनाकर वर्ष 1988 में निकाय चुनाव से शुरुआत की और मोदीनगर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन बने। वर्ष 2007 तक लगातार पालिका के चेयरमैन रहे लेकिन इसी वर्ष हुए निकाय चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। बाद में वर्ष 2012 में महिला सीट होने पर उनकी पत्नी सरोज शर्मा चेयरपर्सन बनीं।
रामआसरे ने वर्ष 1993 में सपा का दामन पकड़ा और वर्ष 1999 में पार्टी के टिकट पर गाजियाबाद-मोदीनगर लोकसभा से सांसद का चुनाव लड़े लेकिन हार गए। वह इससे पहले भी चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन हर बार कम अंतर से हार देखनी पड़ी। उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान के आदेश का पालन होगा। उन पर भरोसा जताया गया है, जिस पर वह खरा उतरकर दिखाएंगे।
गठबंधन पर निर्णय के बाद घोषित होंगी साहिबाबाद-गाजियाबाद की सीटें
साहिबाबाद विधानसभा सीट के कई दिग्गज नेता टिकट की दौड़ में शामिल हैं, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस से गठबंधन की चर्चाओं के चलते साहिबाबाद, गाजियाबाद और मुरादनगर सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए गए हैं। हो सकता है कि गठबंधन की स्थिति में तीनों सीटें कांग्रेस की झोली में चलीं जाएं। बहरहाल, गठबंधन के बारे में सपा नेता कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं।