पंजाब लाइन कालोनी में एक सड़क निर्माण को लेकर नगर निगम और रेलवे आमने-सामने आ गए हैं। नगर निगम ने यहां सड़क निर्माण शुरू कराया तो रेलवे अधिकारियों ने जमीन पर मालिकाना हक का दावा कर निर्माण रुकवा दिया।
अब दो विभागों के बीच फंसकर कालोनी के लोग परेशान हैं। वह निगम पर सड़क निर्माण पूरा कराने का दबाव बना रहे हैं। वहीं मेयर ने इस संबंध में रेलवे के डीआरएम से बात कर सड़क निर्माण की इजाजत देने को कहा है।
बजरिया पुलिस चौकी के पीछे पंजाब लाइन नाम से रेलवे की ही कालोनी बसी है, लेकिन इस कालोनी में सड़क , नाली, सीवर की सुविधा नगर निगम दे रहा है। रेलवे ने ट्रैक के पास बाउंड्रीवाल कर कालोनी को अलग कर दिया है।
इसी बाउंड्रीवाल के पास कालोनी का रास्ता है। लंबे समय से यह रास्ता जर्जर हालत में है। कालोनी के लोगों की मांग पर नगर निगम ने बीते दिनों यहां सड़क निर्माण शुरू किया था। निर्माण शुरू होने के बाद रेलवे के अधिकारियों ने यह कहकर काम रुकवा दिया कि जमीन रेलवे की है और इस पर कोई दूसरा विभाग निर्माण नहीं करा सकता।
ऐसे में करीब एक सप्ताह से सड़क निर्माण का काम बंद है। कालोनी के लोग निगम के चक्कर लगा रहे हैं। महापौर अशु वर्मा ने पहले स्थानीय रेलवे अधिकारियों से वार्ता की, हल न निकला तो बृहस्पतिवार को दिल्ली डिवीजन के डीआरएम अरुण अरोरा से फोन पर वार्ता की।
उन्होंने आश्वस्त किया कि जमीन रेलवे की ही रहेगी, निगम उस पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर रहा। पंजाब लाइन कालोनियों के निवासियों की सहूलियत के लिए रेलवे की बजाय निगम अपना फंड खर्च कर सड़क निर्माण करा रहा है।
यानी रेलवे का काम निगम कर रहा है। महापौर का कहना है कि डीआरएम ने उन्हें मौखिक रूप से काम शुरू कराने की सहमति दे दी है, लेकिन निगम लिखित तौर पर कार्रवाई कर सड़क निर्माण शुरू करेगा।