भारत में करीब 12 फीसदी लोगों में खर्राटे की समस्या है। करीब दो फीसदी लोगों में यह बीमारी गंभीर अवस्था में है, जिनको तुरंत जांच या इलाज की जरूरत है। यह कहना है आईएमए के चिकित्सकों का।
वर्ल्ड स्लीप डे की पूर्व संध्या पर आईएमए भवन में बृहस्पतिवार को प्रेस वार्ता का आयोजन किया। प्रेसवार्ता में डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि खर्राटे आना, दिन में ज्यादा नींद आना, काम के वक्त सो जाना, ड्राइविंग के वक्त सोना, सोते वक्त अचानक सांस रुकने के अहसास से नींद खुल जाना यह सब खतरनाक हो सकता है।
यह सभी लक्षण जानलेवा बीमारी आब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के हो सकते हैं। न्यूरो सर्जन डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि मोटे लोगों में, छोटी गर्दन वाले लोगों में, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटिज और शराब का सेवन करने वालों को यह खतरा सबसे अधिक होता है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. सुभाष अग्रवाल और डॉ. वीबी जिंदल ने बताया कि ओएसए के कई खतरे हैं जैसे हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर बढ़ना, अचानक सोते समय दिल की गतिविधि बंद होना और ड्राइविंग के समय नींद आने से एक्सिडेंट का खतरा होता है।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी का इलाज संभव है इसके लिए स्लीप टेस्ट कराया जाता है जिससे बीमारी की गंभीरता का पता चलता है। इसके उपचार के लिए एक मशीन रोगी को लगाई जाती है जिसे सी पेप मशीन करते हैं। जांच एवं इलाज से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
नियमित व्यायाम एवं उचित खानपान से अपने वजन पर नियंत्रण रखा जा सकता है। इस वार्ता मे आईएमए सचिव डॉ. पल्लव रस्तोगी और डॉ. शशांक सिंघल मौजूद रहे।