नशे के सामान की तस्करी के लिए तस्कर नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर में हर सातवें-आठवें दिन इस तरह का खुलासा हो रहा है। कभी गांजा तस्कर पकड़े जाते हैं तो कभी स्मैक के तस्कर। नशे का सामान कभी ट्रक में अलग से केबिन बनवा उसमें छिपाकर लाया जाता है तो कभी सब्जियों के बीच में रखकर। फैंसीड्रिल की तस्करी भी इसी तरह की जा रही है। सिर्फ दिल्ली-एनसीआर नहीं, यूपी में कई जगहों से इन्हें पश्चिम बंगाल और बिहार भेजा जाता है। कई बार बांग्लादेश तक भेजे जाने का खुलासा हो चुका है। तस्करी में लगीं फर्में जीएसटी की चोरी भी कर रही हैं। इसके लिए फर्जी बिल बनाए जाते हैं।
बिहार में बढ़ी मांग
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से ही ऐसे सिरप की मांग बढ़ी हुई है, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है। जिन सिरप में कोडीन होता है, उनकी मांग सबसे ज्यादा है। गाजियाबाद से पहले मेरठ, बुलंदशहर और आगरा से फैंसीड्रिल सिरप बिहार में सप्लाई किए जाने का खुलासा हो चुका है। इन्हें तीन से चार गुना दाम पर बेचा जाता है।