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घरों में पानी, दिलों में डर: गाजियाबाद की छह कॉलोनियां जलमग्न, घर खाली करने की मुनादी; परिवारों का पलायन शुरू

Mon, 20 Jul 2026 09:23 AM IST
Rahul Kumar Tiwari माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद

सार

गाजियाबाद में हिंडन नदी का बंधा टूटने से करहेड़ा की कई कॉलोनियों में पानी घुस गया। 50 से अधिक मकान प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने राहत शिविर शुरू कर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है, जबकि जल निकासी के प्रयास जारी हैं।
 
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हिंडन बंधा टूटने से कई कॉलोनी जलमग्न - फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
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गाजियाबाद में हिंडन नदी पर नूरनगर-सिंघानी की ओर शनिवार शाम बंधा टूट गया। जिससे रविवार को करहेड़ा की आधा दर्जन कॉलोनियों के लिए मुसीबत बन गया। रातभर पानी आवासीय क्षेत्रों की ओर बढ़ता रहा। दोपहर तक केशव एन्क्लेव, ऊधम सिंह कॉलोनी, शिवम एन्क्लेव, सिटी फॉरेस्ट कॉलोनी, कृष्णा कुंज और नूरनगर की गलियों में पानी घुस गया। 50 से अधिक मकान इसकी चपेट में आ गए।

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घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
हालात बिगड़ते देख जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों से घर खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। करहेड़ा कंपोजिट विद्यालय में राहत शिविर बनाया गया है, जबकि लोगों के सामान की निकासी के लिए ट्रैक्टर भी तैनात किए गए हैं। इस बीच नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन लोगों में खौफ बरकरार है।
 

अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का किया निरीक्षण
पिछले एक सप्ताह से हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। चार दिन पहले सिटी फॉरेस्ट कॉलोनी में पानी भरना शुरू हो गया था। शनिवार शाम नदी से जलकुंभी हटाने के दौरान नूरनगर-सिंघानी की ओर पानी रोकने के लिए एडीएम अंजनी कुमार, तहसीलदार रितेश कुमार सिंह और अन्य अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने पहले ऊर्जा निगम कार्यालय का जायजा लिया, जहां पानी भर रहा था। इसके बाद टूटे बंधे का निरीक्षण कर सिंचाई विभाग को मिट्टी डलवाकर कटाव रोकने के निर्देश दिए।

 
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 हरसंभव राहत का भरोसा
अधिकारियों ने कई प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव राहत का भरोसा दिलाया। वहीं, सिटी फॉरेस्ट कॉलोनी और शिवम एन्क्लेव के लोगों ने पानी की निकासी के लिए अपने खर्च पर नदी और खेतों में फैली जलकुंभी हटवाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन दूसरी ओर सफाई करा रहा था, इसलिए कॉलोनी के लोगों ने एक-एक हजार रुपये का सहयोग जुटाकर निजी स्तर पर सफाई कराई, ताकि पानी का बहाव सुचारु हो सके।
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