- स्वतंत्र साक्ष्य पेश नहीं कर सकी पुलिस, अदालत ने कहा
- आरोप साबित करने में अभियोजन विफल
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) ने सिहानी गेट थाने में दर्ज करीब 10 साल पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में फैसला सुनाते हुए महिला समेत छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। दिव्या सांगवान, सुंदर कुमार, अंकित, जतिन बत्रा, समीर चौधरी और सुधीर चौधरी को बरी कर दिया। मामले के एक अन्य आरोपी सोनू की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।
अभियोजन के अनुसार अप्रैल 2016 में सिहानी गेट पुलिस ने दिव्या सांगवान के नेतृत्व में संचालित एक कथित गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस का आरोप था कि गिरोह लूट, रंगदारी, जानलेवा हमला और मारपीट जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। गैंग चार्ट का मुख्य आधार निजी कंपनी के कर्मचारियों के साथ हुई लूट और फायरिंग की घटना को बनाया गया था। सुनवाई के दौरान पुलिस कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर सकी, जो यह साबित कर सके कि आरोपियों ने संगठित गिरोह बनाकर समाज में भय या आतंक का माहौल बनाया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि जिन मामलों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था, उनमें आरोपी पहले ही निचली अदालतों से बरी हो चुके हैं। मुख्य घटना के वादी अंकुर वशिष्ठ ने भी अदालत में गवाही देते हुए कहा कि अदालत में मौजूद किसी भी आरोपी की घटना में संलिप्तता नहीं थी।