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साहब!में बेबस मां हूं, अपने बच्चे का इलाज भी नहीं करा सकी

Thu, 25 Aug 2016 12:56 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला मुरादनगर
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अन्य - फोटो : अमर उजाला
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इलाज के अभाव में ब्लड कैंसर से पीड़ित एक मासूम की मंगलवार रात मौत हो गई। बताया गया है कि मृतक के दो बड़े भाई भी ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। बच्चों के इलाज के लिए मां ने मकान तक गिरवी रख दिया है। बेटे की मौत से महिला का रो रोकर बुरा हाल है।
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नया नूरगंज कालोनी में यामीन (75) परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में पत्नी शकीना, बेटी आसमां, आसिफा और बेटा मोमीन हैं। सात साल उन्होंने आसमां का निकाह अकरम पुत्र नसीमुद्दीन निवासी ललियाना मेरठ से की थी।

आसमां के तीन बेटे कैस (5), कैफ (2) और जैद (1) हुए। तीनों बच्चे बीमार रहते थे। जांच में पता चला कि तीनों को तीनों को ब्लड कैंसर है। उसका पति अकरम फल बेचने का काम करता है।
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उसने यह कहकर आसमां और बच्चों को घर से निकाल दिया कि उनकी बीमारी का खर्च वह नहीं उठा सकता। इसके बाद आसमां अपने मायके आ गई और मजदूरी कर तीनों बच्चों का इलाज कराने लगी।

उसने बताया कि कैफ का इलाज एम्स में चल रहा था। कभी दो महीने तो कभी तीन महीने में तीनों बच्चों का ब्लड बदलवाना पड़ता था। आर्थिक तंगी के कारण एम्स से इलाज बंद कराना पड़ा।

इसके बाद कभी मेरठ तो कभी गाजियाबाद के अस्पताल में लोगों की मदद से बच्चों का इलाज करा रही थी। महिला के मुताबिक बच्चों के इलाज के लिए उसके पिता ने अपना घर तक गिरवी रख दिया है मंगलवार रात करीब नौ बजे छोटे बेटे जैद की तबीयत अधिक खराब हो गई।

हालत बिगड़ने पर बेटे को पैदल ही करीब ढाई किमी तक लेकर दौड़ी, मगर बस स्टैंड तक पहुंचते-पहुंचते जैद ने दम तोड़ दिया। महिला ने अन्य बेटों के इलाज के लिए नेताओं से गुहार लगाई है। बेटे की मौत से महिला सदमे में है और उसका रो रोकर बुरा हाल है।  

विधायक ने की मदद
बसपा विधायक वहाब चौधरी ने महिला के तीनों बेटों के इलाज के लिए आसमां की दो लाख रुपये देकर आर्थिक मदद की थी। इसके अलावा जब भी आसमां ने विधायक से मदद मांगी तो उन्होंने 10-20 हजार रुपये की मदद की।

आसमां ने बताया कि करीब सात माह पहले सीएम राहत कोष से मदद के लिए सपा एमएलसी आशु मलिक ने फाइल भेजी थी, लेकिन अब तक उसे कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। उसने बताया कि दो दिन पहले कचहरी में कुछ लोगों ने साढे़ चार हजार रुपये की मदद की थी।

पिता ने गिरवी रख दिया घर
आसमां के पिता यामीन ने बच्चों के इलाज के लिए ढाई लाख रुपये में अपना घर गिरवी रखा दिया है। उन पर करीब साढे़ तीन लाख रुपये का कर्ज भी हो चुका और छह लाख लोगों की मदद से बच्चों के उपचार में लगा चुके हैं। आसमां की मां शकीना के भी तबीयत खराब रहती है। पिता यामीन को फालिश मार गया है।
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