एनआरएचएम घोटाले में फंसे गाजियाबाद के पूर्व सीएमओ डॉ. वीपी सिंह समेत पांच आरोपियों के खिलाफ सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। जनवरी में चार्जशीट दाखिल होने के बाद कई बार कोर्ट ने आरोपियों को सम्मन भेजे थे, मगर वह कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि 2010-11 में अपने पद पर रहते हुए गाजियाबाद में तत्कालीन सीएमओ (परिवार कल्याण) डॉ. वीपी सिंह, उप सीएमओ (भंडार) डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन मुख्य फार्मासिस्ट घनश्याम सिंह ने लखनऊ की दो फर्मों मैसर्स एमकेपी फार्मा और मैसर्स ओम ड्रग्स डिस्ट्रीब्यूटर्स से नियमों को ताक पर रखते हुए उच्च दरों पर आईएफए, अलबेंडाजोल, ऑपरेशन फालोअप किट और आईयूसीडी दवा किट की खरीद की गई थी।
इसके लिए आरोपी सीएमओ ने दो प्रमुख समाचार पत्रों में निविदा आमंत्रण सूचना प्रकाशित कराना भी दर्शाया था, जोकि पूरी तरह से फर्जी था। इन समाचार पत्रों में कोई प्रकाशन हुआ ही नहीं था।
वरिष्ठ लोक अभियोजक बीके सिंह और अनुराग मोदी के अनुसार बुधवार को इस मामले में कोर्ट ने डॉ. वीपी सिंह, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह, फार्मासिस्ट घनश्याम सिंह के साथ ही दवा कारोबारी दंपति नीरज श्रीवास्तव, रीता श्रीवास्तव और मनीष कात्याल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।