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Ghaziabad News: सिंगापुर की युवती ने फर्जी एप से ठग लिए 19.66 लाख रुपये

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गाजियाबाद। इंदिरापुरम की एटीएस एडवांटेज सोसायटी में रहने वाले सुधांशु गुप्ता से दोस्ती कर युवती ने फर्जी एप पर निवेश कराकर 19.66 लाख रुपये ठग लिए। खुद को सिंगापुर से बताने वाली युवती मेलिसा ने जहाज के रास्ते विदेशों में खाद्य आपूर्ति डिलीवरी करने के व्यापार का झांसा देकर ठगी की। उधर, सर्वोदय कॉलोनी में रहने वाले एमबीए के छात्र अरुण कुमार तोमर से साइबर ठगों ने 7.97 रुपये ठग लिए। पीड़ितों ने साइबर थाने में मुकदमे दर्ज कराए हैं।
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एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि इंदिरापुरम निवासी सुधांशु गुप्ता के मुताबिक जुलाई माह में उन्हें एक युवती का कॉल आया। कॉलर ने बताया कि वह सिंगापुर में रहती हैं और उसका नाम मेलिसा है। दोनों में दोस्ती हुई तो मेलिसा ने बताया कि चीन में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पानी के जहाज द्वारा होती है। चीन का मोबाइल एप एलाईएक्सप्रेस से आर्डर मिलते हैं और मोबाइल से ही बुकिंग कर खाद्य आपूर्ति विदेशों में भेज दी जाती है। युवती के झांसे में आए सुधांशु गुप्ता ने उसके बताए मोबाइल एप को डाउनलोड कर निवेश किया। युवती उन्हें मुनाफा जल्द मिलने का आश्वासन देती रही। इसी बीच उन्हें जेर्डे नाम की युवती ने कॉल किया और बताया कि वह इंडोनेशिया से है। कमीशन की धनराशि अमेरिकी डॉलर में ट्रांसफर कराई। बताया कि साइबर ठगों ने 19 अलग-अलग बैंक खातों में 19 लाख 66 हजार 150 रुपये ट्रांसफर कराए। जब उन्हें मुनाफे और निवेश की गई धनराशि वापस नहीं मिली तो उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

उधर दूसरी वारदात विजयनगर थाना क्षेत्र स्थित सर्वोदय नगर कालोनी में रहने वाले अरुण कुमार तोमर के साथ हुई। अरुण तोमर के मुताबिक वह एमबीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। 13 जुलाई 2025 को उन्हें एक लिंक भेजा गया और टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया। इस ग्रुप में करीब 200 सदस्य सक्रिय थे। इसके बाद निशुल्क टास्क पूरे करने के लिए दिए गए और फिर उन्हें प्रीपेड कर दिया गया। जहां हजारों रुपये खर्च करने के बाद भी मुनाफा नहीं हुआ। साइबर ठगों ने शेयर ट्रेडिंग के काइनबेस मोबाइल एप डाउनलोड कराया और मोटे मुनाफे का झांसा देकर अधिक से अधिक निवेश करने का दबाव बनाया। अरुण कुमार तोमर के मुताबिक पहले ही दिन 1010 रुपये निवेश करने पर 1313 रुपये का लाभ हुआ। इसके बाद गलत क्रिप्टो सलेक्शन और डेटा क्रैश होने का बहाना बनाकर लाखों रुपये ट्रांसफर कराए गए। बताया कि लॉ रेप्यूटेशन स्कोर और टैक्स क्लीयरेंस करने की एवज में लाखों रुपये ट्रांसफर कराए गए। पीड़ित ने बताया कि डी-मैट खाते से वह अपनी ही धनराशि नहीं निकाल पाए। ऐसे में उन्हें साइबर ठगी का अहसास हुआ। हालांकि जब तक वह सात लाख 97 हजार 614 रुपये निवेश कर चुके थे। पीड़ित ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराकर निवेश किए गए 7.97 लाख रुपये वापस दिलाने की मांग की है। एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि दोनों पीड़ितों की तहरीर पर मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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