अब कान के पर्दे की सर्जरी कराने में कान के कार्टिलेज में सूजन आने और उसकी संवेदनशीलता चले जाने का डर नहीं रहेगा। यही नहीं, कान की शेप भी नहीं बिगड़ेगी। यह संभव हुआ है गाजियाबाद में आई नई तकनीक से। ऑपरेशन का समय भी आधा रह गया है।
एक्सीडेंट होने, चोट लगने या किसी अन्य वजह से जब कान का पर्दा फट या खराब हो जाता है, तब उसे दोबारा बनाया जाता है। अभी तक ईएनटी सर्जन कान का पर्दा बनाने के लिए कान के पीछे चीरा लगाकर उसे पलट देते थे।
इसके बाद फोम केजरिए कान का पर्दा बनाया जाता था, लेकिन अब इस सर्जरी के लिए एंडोस्कोपिक स्कारलेस कार्टिलेज टिमपैनोप्लास्टी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें खतरा नहीं है।
ईएनटी, नेक एंड हेड सर्जन डा. बीपी त्यागी ने बताया कि इस तकनीक में दूरबीन विधि से कान के छेद से ही कैमरा, औजार और फोम डालकर पर्दा बनाया जाता है। कहीं पर भी चीरा और टांके लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। ईएनटी सर्जन डा. सुशांत त्यागी ने बताया कि ऑपरेशन में अब सिर्फ 15 मिनट का ही समय लगता है, जबकि पहले 30 मिनट लगते थे।
कोलकाता मेडिकल कांफ्रेंस में डेमो भी किया गया
हाल ही में डा. बीपी त्यागी को एंडोस्कोपिक स्कारलेस कार्टिलेज टिमपैनोप्लास्टी तकनीक पर लेक्चर कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल मेडिकल कांफ्रेंस में बुलाया गया था, जहां इस तकनीक का डेमो दिया गया गया।