साहिबाबाद। कनावनी में 16 अप्रैल को आग से 150 झुग्गियां राख होने के बाद भी जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया। महज कुछ ही दिनों में उसी जमीन पर एक बार फिर झुग्गियां बस गई हैं। टीनशेड की आड़ में कबाड़ के गोदाम बनाए गए हैं और बिजली कनेक्शन से आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है। हैरानी की बात यह है कि बिजली के मीटरों को चादर से ढककर छिपाया गया है, जबकि टीनशेड की दीवारों से पूरे इलाके को घेर दिया गया है।
कनावनी में बड़े कबाड़ गोदाम बनाकर मोटा किराया वसूला जा रहा है। पिछले हादसे में जिन लोगों की झुग्गियां जलकर राख हो गईं, उन्हीं में से कई परिवार दोबारा यहां बस गए हैं। करीब तीन हजार रुपये प्रतिमाह किराया और बिजली खर्च भी इनसे वसूला जा रहा है। एक तरफ जहां लोग खुद भी जान को जोखिम में डाल रहे हैं वहीं ,दूसरी ओर जिम्मेदारों ने भी आंख मूंद ली हैं। उनकी नाक के नीचे दोबारा बिजली चोरी का खेल शुरू हो गया और कार्रवाई करने की जरूरत तक नहीं समझी जा रही है। यह सिलसिला सिर्फ कनावनी तक सीमित नहीं है। वैशाली सेक्टर तीन में मई माह में आग लगने से करीब 20 झुग्गियां जलकर राख हो गई थीं, लेकिन लोगों ने दूसरे प्लॉट पर बसावट शुरू कर दी है। वहां ई-रिक्शा पार्किंग और कबाड़ गोदाम बन चुका है। इंदिरापुरम, कौशांबी, टीलामोड़ और साहिबाबाद सहित अन्य इलाकों में पहले भी इसी तरह के हादसे हो चुके हैं, लेकिन हालात बदले नहीं हैं। सात माह में 300 से अधिक झुग्गियां आग हादसों में जल चुकी हैं। इसके बावजूद सैकड़ों परिवार अपनी जान की चिंता किए बिना बिजली के खुले तारों और टीनशेड की तंग गलियों में जीवन गुजार रहे हैं। अवैध कब्जे और बिजली आपूर्ति की इन घटनाओं पर प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अब तक पूरी नहीं हुई पहले हादसे की जांच
16 अप्रैल को कनावनी आग हादसे के बाद ऊर्जा निगम ने जांच शुरू की थी। जांच में झुग्गियों में कनेक्शन देने के जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी सामने आए जो वर्तमान में दूसरे जिले में तैनात हैं। उनके बयान अब तक दर्ज नहीं हुए हैं।
हवा-हवाई हो गए सर्वे के आदेश
कनावनी आग हादसे के बाद प्रशासन ने जिले में झुग्गी-झोपड़ियों के सर्वे के निर्देश दिए थे। इनमें कहां-कहां झुग्गी-झोपड़ी बसी हुई हैं और कितने लोग रह रहे हैं। वहां बिजली आपूर्ति की क्या व्यवस्था है और यदि कनेक्शन दिए गए हैं तो किस आधार पर। इस तरह के सभी सवालों के जवाब तलाशने थे, लेकिन अब तक न तो सर्वे पूरा हुआ और न ही यह यह निर्देश जमीन पर दिखाई दिए।
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पिछले हादसे में दो अधिकारियों के नाम सामने आए थे उन्हें नोटिस भेज दिया गया है। गलत प्रपत्रों के आधार पर बिना जांच किए कनेक्शन जारी करने की पुष्टि होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। दोबारा कनेक्शन देने और बिजली आपूर्ति कराने के मामले में जांच के निर्देश दिए गए हैं। अखिलेश सिंह, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम जोन तीन
नगर निगम और जीडीए समेत अन्य विभागों को सर्वे करना था। दमकल को इस टीम में शामिल नहीं किया गया था। मानकों के अनुसार दमकल विभाग सभी स्थानों पर लगातार चेकिंग कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज चुका है। आगे की कार्रवाई प्रशासन के निर्देश पर की जाएगी। राहुल पाल, सीएफओ गाजियाबाद।
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कनावनी गांव के पास फिर से बनी झुग्गी झोपड़ी में लगा बिजली मीटर। संवाद- फोटो : Samvad
कनावनी गांव के पास फिर से बनी झुग्गी झोपड़ी में लगा बिजली मीटर। संवाद- फोटो : Samvad
कनावनी गांव के पास फिर से बनी झुग्गी झोपड़ी में लगा बिजली मीटर। संवाद- फोटो : Samvad
कनावनी गांव के पास फिर से बनी झुग्गी झोपड़ी में लगा बिजली मीटर। संवाद- फोटो : Samvad