कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के लिए हिंडन मोक्ष स्थली पर बनाए गए नौ प्लेटफार्म उत्तर-दक्षिण दिशा के फेर में फंस गए हैं। अंतिम संस्कार के लिए बनाए जाने वाले प्लेटफार्म की दिशा उत्तर-दक्षिण होनी थी, लेकिन नगर निगम अधिकारियों ने पूरब-पश्चिम दिशा में बनवा दिए। धार्मिक दृष्टि से गलत दिशा में बने इन प्लेटफार्म पर अब लोग अंतिम संस्कार करने से कतरा रहे हैं। निगम की ओर से खर्च किए गए करीब दो लाख से ज्यादा की रकम बर्बाद हो गई।
कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम संस्कार के लिए नगर निगम की ओर से हिंडन मोक्ष स्थली पर विद्युत शवदाह गृह संचालित है। लेकिन गुणवत्ता खराब होने से यह अक्सर खराब रहता है। इस स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने इन नौ प्लेटफार्म में से पांच का जुलाई 2020 में निर्माण कराया था, जबकि बाकी चार नवंबर में बनाए गए थे। इन्हें कोरोना संक्रमित शवों के लिए रिजर्व रखा गया है, जबकि सामान्य शवों का अंतिम संस्कार अलग परिसर में कराया जा रहा है। धर्म के जानकार लोग इन प्लेटफार्म पर शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए राजी नहीं हो रहे।
इलेक्ट्रिक शवदाह गृह खराब हो जाने की दशा में कर्मचारी मजबूरी और दबाव में लोगों को इन प्लेटफार्म पर शव के अंतिम संस्कार के लिए राजी करते हैं। बीते साल इन नौ प्लेटफार्म पर महज 10 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, जबकि कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 104 के पार रहा। कई बार ऐसा मौका आया जब लोगों ने इन प्लेटफार्म पर अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और मजबूरी में सामान्य शवों के लिए बने प्लेटफार्म का ही उपयोग करना पड़ा।
फायर ब्रिक का भी नहीं किया गया इस्तेमाल, प्लेटफार्म चिटके
अंतिम संस्कार के लिए बनाए जाने वाले प्लेटफार्म में फायर ब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है। यह ब्रिक (ईंटें) आग से बढ़ने वाले तापमान को झेलने में सक्षम होती हैं और प्लेटफार्म लंबे समय तक चटकते नहीं हैं। लेकिन नगर निगम ने साधारण ईंटों से इन प्लेटफार्म का निर्माण करा दिया। सामान्य ईंट आग का तापमान नहीं झेल पाती हैं। ऐसे में छह माह में ही ये प्लेटफार्म चिटकने लगे हैं।
अंतिम संस्कार के लिए संख्या बढ़ी
सामान्य दिनों में हिंडन मोक्ष स्थली पर औसतन 14 से 15 शवों का अंतिम संस्कार रोजाना होता था। अब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में यहां अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ गई है। अब प्रतिदिन 18 से 31 शवों का अंतिम संस्कार हो रहा है। बीते 14 दिन में हिंडन मोक्ष स्थली पर 317 सामान्य और करीब 10 से ज्यादा कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार हो चुका है। इसकी वजह से प्लेटफार्म फिर कम पड़ने लगे हैं।
बीते दिनों हुए अंतिम संस्कार की संख्या
तारीख अंतिम संस्कार
5 अप्रैल 18
6 अप्रैल 27
7 अप्रैल 25
8 अप्रैल 19
9 अप्रैल 21
10 अप्रैल 26
11 अप्रैल 31
12 अप्रैल 25
13 अप्रैल 23
14 अप्रैल 23
परिचर्चा
अंतिम संस्कार के दौरान शव का सिर उत्तर और पैर दक्षिण दिशा में रखे जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से यही सही है। नगर निगम ने गलत दिशा में अंतिम संस्कार के प्लेटफार्म बना दिए हैं। इन पर अंतिम संस्कार कोई नहीं कर रहा है और यह पैसों की बर्बादी है।
- संजय चौधरी, अर्थला निवासी
हर जगह अंतिम संस्कार के प्लेटफॉर्म उत्तर-दक्षिण दिशा में ही बने होते हैं। नगर निगम ने पूरब-पश्चिम दिशा में प्लेटफार्म बनाकर नया नमूना पेश किया है। यह गलत हैं। इसकी शिकायत नगर आयुक्त व महापौर से करेंगे। इन्हें ठीक कराएंगे।
- रविंद्र डबास, पार्षद पति अर्थला
क्या कहते हैं पंडित
पंडित राजेश बताते हैं कि पूरब-पश्चिम दिशा में जब व्यक्ति लेटता है तो उसे विश्राम वास कहा जाता है। यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी सही है। दक्षिण दिशा को पितृ दिशा कहा जाता है। इसलिए मरने के बाद शव को उत्तर में सिर और दक्षिण में पैर करके रखा जाता है। इसे मरण दिशा भी कहा जाता है। पूरब-पश्चिम दिशा में शव को रखकर अंतिम संस्कार करना धार्मिक दृष्टि से पूर्णतया गलत है।
अधिकारी बोले
जगह की उपलब्धता के हिसाब से प्लेटफार्म बनवा दिए गए थे। अगर दिशा की कोई दिक्कत हैं तो प्लेटफार्म में बदलाव कराया जाएगा। उनकी दिशा सही कराई जाएगी।
- डॉ. मिथिलेश कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम