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Ghaziabad News: छिजारसी टोल का संचालन करने वाली फर्म पर लगा सात लाख जुर्माना

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गाजियाबाद। छिजारसी टोल प्लाजा का संचालन करने वाली फर्म पर एनएचएआई ने सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एनएचएआई की ओर से एक अधिवक्ता की शिकायत पर जांच के बाद मिली अनियमितताओं को देखते हुए यह जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना भरने के लिए कंपनी को सात दिन का समय दिया गया है।
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वर्तमान में टोल प्लाजा के रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली-हापुड़- मेरठ एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड के पास है। यह फर्म ही हाईवे के रखरखाव का जिम्मा संभाल रही है। टोल पर भी कंपनी का ही स्टाफ तैनात रहता है। गत दिनों छिजारसी टोल प्लाजा पर हापुड़ निवासी अधिवक्ता दीपक सिंह चौहान की ओर से टोल कर्मियों पर बदसलूकी करने का आरोप लगाकर शिकायत की गई थी। इसके बाद एनएचएआई की ओर से अधिवक्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान पाया गया कि टोल पर तैनात स्टाफ की ओर से आए दिन वहां से गुजरने वाले वाहन सवारों से बदसलूकी की जा रही है। ऐसे कई मामले जांच के दौरान भी पाए गए। इस पर संज्ञान लेते हुए एनएचएआई के परियोजना निदेशक अरविंद कुमार ने कंपनी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वहीं, जांच के दौरान यह भी पाया गया कि टोल प्लाजा पर घंटों वाहनों की कतारें लगी रहती हैं। इस वजह से झगड़े हो रहे हैं। प्लाजा पर बनी लेन को बेवजह ही बिना प्राधिकरण को सूचित किए बंद रखा जाता है। इससे संबंधित भी कई शिकायतें एनएचएआई को की गईं। सभी शिकायतों की बिंदुवार एनएचएआई की टीम ने जांच की, तो पाया कि यातायात प्रबंधन के लिए तैनात स्टाफ अपनी जिम्मेदारी ही नहीं निभा रहा है या कई बार स्टाफ ही नहीं तैनात किया जा रहा है। वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, परेशान लोग झगड़ा करने लगते हैं। इन खामियों को देखते हुए टोल कंपनी पर एनएचएआई ने अलग से पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

सात दिन के भीतर नहीं भरा जुर्माना तो सिक्योरिटी से कटेगा
एनएचएआई की ओर से जारी नोटिस में टोल कंपनी को जुर्माने की अदायगी के लिए सात दिनों का समय दिया गया है। समयसीमा में जुर्माना न भरने पर कंपनी की ओर से जमा की गई सिक्योरिटी की धनराशि में से जुर्माना काट लिया जाएगा।
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वर्जन

टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों की ओर से वाहन सवारों के साथ बदसलूकी करने की शिकायतें आ रही थीं। जांच में जो बिल्कुल सही पाई गई है। इसके बाद अन्य बिंदुओं पर भी जांच की गई तो कई खामियां मिली हैं। कंपनी की ओर से एग्रीमेंट में वर्णित नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था, इसे देखते हुए कुल सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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