26 वर्षीय शोधार्थी आशुतोष तोमर का इंटरस्टेलर धूल कणों पर रिसर्च अमेरिकी जर्नल एपीजी में प्रकाशित होगा। लेकिन पिता का दावा है कि अस्पताल के डॉक्टर एसके त्यागी की लापरवाही व ओवरडोज से मौत हुई। डॉक्टर ने आरोप निराधार बताए।
जलालपुर रोड स्थित वंदना एनक्लेव कॉलोनी निवासी वैज्ञानिक आशुतोष तोमर का मरणोंपरांत अमेरिका की पत्रिका में शोध प्रकाशित होगा। पिता ने डॉक्टर की लापरवाही से बेटे की मौत होने का आरोप लगाया है। आरोप है कि डॉक्टर व उनके पिता उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं।
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प्रेसवार्ता के दौरान अधिवक्ता बिजेंद्र कुमार ने कहा है मेरा इकलौता बेटा आशुतोष तोमर (26)नैनीताल स्थित आर्यभट्टा स्पेस रिसर्च सेंटर में शोधार्थी था। वह छुट्टी में घर आया हुआ था, जनवरी 2025 में आशुतोष के पेट में दर्द होने पर उसे स्थानीय हंस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण बेटे की हालत बिगड़ गई थी। इसके बाद उसे हायर सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान आशुतोष की मौत हो गई थी। बिजेंद्र कुमार ने बताया कि हायर सेंटर के डॉक्टर ने उन्हें बताया कि दवा की ओवरडोज के कारण आपके बेटे की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। अधिवक्ता ने मामले में डॉक्टर एसके त्यागी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि डॉक्टर व उनके पिता खुद को निर्दोष बता उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं।
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बताया कि दो दिन पहले बेटे के संस्थान से मेल आया कि उसकी रिसर्च को अमेरिका की पत्रिका एपीजी प्रकाशित करने जा रही है।आशुतोष रिसर्च अंतर तारामंडलीय धूल कणों के संचरण संबंधित था। उक्त प्रत्रिका में प्रकाशित होने वाले शोध के आशुतोष प्रदेश के पहले युवा हैं।
उनका कहना है कि आज उनका बेटा जीवित होता तो यह क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होती। लेकिन डॉक्टर की लापरवाही के कारण उनके बेटे की मौत हो गई। आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई होने के बाद भी डॉक्टर अपना क्लीनिक खोल कर बैठे हैं। इतना ही नहीं उनका लाइसेंस भी अस्थाई निलंबित हुआ है।उधर डॉक्टर एसके त्यागी का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार है।