तीज मेले में सेल्फी लेती महिलाएं। संवाद
गाजियाबाद। सावन आया तो कभी आंगन में झूले पड़े, गीत गूंजे और सिंधारे में मायके से आई चुनरी, चूड़ियां और मिठाइयां सजीं। अब वही सावन बदलते समय के साथ नए रंग, नए फैशन और नए स्वाद के साथ शहर के बाजारों में उतर आया है। कहीं हाथों पर मेहंदी रच रही है तो कहीं चूड़ियों की खनक सावन का संगीत बन रही है। कुछ जगहों पर महिलाएं, बेटियों के लिए सिंधारा खरीदकर परंपरा को नए अंदाज में आगे ले जा रही हैं। इसके अलावा महिलाएं अपनी पसंद के हिसाब से अपनी नए जमाने के लिवाज भी खरीद रही हैं। गाजियाबाद कविनगर स्थित एक हॉल में लगा विभावरी तीज मेला इसी बदलते सावन की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा है।
विभारी तीज मेले में महिलाएं मेहंदी, चूड़ियों और आर्टिफिशियल ज्वेलरी से सावन का श्रृंगार भी कर रही हैं। पारंपरिक तीज बाजार में इस बार फैशन में जयपुरिया और पाकिस्तानी शूट महिलाओं को सबसे अधिक भा आ रहे हैं। वहीं, गुजरात की आर्टिफिशियल ज्वेलरी और आकर्षक लहंगों की भी खूब मांग है। इसके अलावा खानपान का स्वाद भी महिलाओं को खूब आकर्षित कर रहा है। दिल्ली की मशहूर फतेह की चाट और मथुरा की कुल्फी का स्वाद लेने के लिए भीड़ उमड़ रही है। पाव भाजी, डोसा और छोले कुल्चों का महिलाएं जमकर लुत्फ ली रही हैं।
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महिलाएं बोलीं, पुरानी यादों को ताजा करता मेला
- पहली बार मेले में 130 से अधिक स्टॉल लगाएं गए हैं, जहां लोग जमकर सावन और बेटियों के सिंधारे का सामान भी दिलवा रही हैं। पिंकी मंगल, संस्थापक अध्यक्ष
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-बेटियों को सिंधारा भेजने की परंपरा आज भी प्रचलित है। पहले मां के साथ बाजार जाया करते थे, अब बेटियों के लिए खरीदारी करते हैं चारू जैन, अध्यक्ष, विभारी मेला
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- तीज पर मेहंदी लगवाना और चूड़ियां पहनना बचपन से ही पसंद रहा है। मेले में आकर पुरानी यादें नए अंदाज में लौट आई हैं। फैशन के नए विकल्प भी मिल रहे हैं।- प्रीति कश्यप
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- इस बार जयपुरिया व पाकिस्तानी शूट ज्यादा पसंद आए। इनमें पारंपरिक लुक भी है और आधुनिक फैशन का टच भी। तीज के लिए कुछ अलग चाहती थी, ऐसा ही मिला। - रीना लाहौटी
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