गाजियाबाद। लंबे समय से अटकी मधुबन-बापूधाम योजना के संशोधित ले-आउट को बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल गई है। इससे अब इस योजना से प्रभवित किसान लाभान्वित होंगे।
जीडीए सचिव राजेश कमार सिंह ने बताया कि 2004 से चली आ रही भूमि जुटाव की दिक्कतों, किसानों के विरोध और न्यायालयी अड़चनों के बाद आखिरकार समाधान का रास्ता निकाल लिया गया है। करीब 762 किसानों को अब छह फीसदी विकसित भूमि और उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित 20 फीसदी भूखंड दिए जाएंगे। इसके साथ ही, श्मशान के निकट आवंटित भूखंडों को अन्यत्र स्थानांतरित कर योजना के मानचित्र में आवश्यक संशोधन किया है। यह फैसला न सिर्फ वर्षों पुरानी समस्या को समाप्त करेगा बल्कि किसानों और आवंटियों दोनों को राहत देगा। बोर्ड के इस निर्णय के बाद प्राधिकरण लॉटरी के माध्यम से किसानों को विकसित भूखंड देना शुरू करेगा। लगभग 4000 करोड़ की परिसंपत्तियां अनलॉक हो सकेंगी। बोर्ड बैठक में जीडीए वीसी अतुल वत्स, वित्त नियंत्रक एके वाजपेई, जीडीए मेंबर पवन गोयल व जीडीए के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इन प्रस्तावों पर भी लगी मुहर
1. ग्राम डासना स्थित सुंदरदीप एजुकेशनल सोसाइटी की लगभग 8.93 हेक्टेयर भूमि को कृषि से संस्थागत भू-उपयोग में परिवर्तित करने की मंजूरी।
2. गाजियाबाद, लोनी और मोदीनगर महायोजना-2031 के तहत क्षेत्रों के जोनल डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के लिए कंसलटेंट्स के चयन का प्रस्ताव स्वीकृत। इससे शहर के सुनियोजित विकास की रूपरेखा और मजबूत होगी।