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Ghaziabad News: करोड़ों का राजस्व, फिर भी प्यासे औद्योगिक क्षेत्र

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गाजियाबाद। प्रदेश को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्र खुद बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। जिले के 21 औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित करीब 30 हजार औद्योगिक इकाइयों को आज तक शुद्ध पेयजल की केंद्रीय व्यवस्था नहीं मिल सकी है।
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हालत यह है कि उद्योगों और वहां काम करने वाले 15 लाख से अधिक श्रमिकों की पानी की जरूरत निजी सबमर्सिबल पंपों के सहारे पूरी हो रही है। गर्मी के दिनों में कई क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे जाने से मोटर फेल होने और जलापूर्ति बाधित होने की समस्या भी सामने आती है।
गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि यूपीसीडा और नगर निगम के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों से सरकार को हर वर्ष 35 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद पेयजल आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था न होना चिंता का विषय है।
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बीएस रोड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा का कहना है कि उद्यमियों का कहना है कि वर्षों से पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस योजना लागू नहीं हो सकी है। इसके चलते भूजल दोहन लगातार बढ़ रहा है और जिले का भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की खपत
जिले में यूपीसीडा के 11 और निजी क्षेत्र के 10 औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें करीब 16 हजार इकाइयां यूपीसीडा क्षेत्रों में और लगभग 14 हजार इकाइयां निजी औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित हैं। उत्पादन कार्यों के अलावा पीने के पानी, शौचालय और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की खपत होती है। इसके लिए अधिकांश इकाइयों ने अपने स्तर पर बोरिंग और सबमर्सिबल पंप लगा रखे हैं।
भूजल पर बढ़ रहा संकट
‘सेव ग्राउंड वाटर’ अभियान से जुड़े विशेषज्ञ सुशील राघव के अनुसार, हजारों सबमर्सिबल पंपों के जरिये लगातार पानी निकाले जाने से भूजल स्तर पर भारी दबाव पड़ रहा है। जिले में हर वर्ष भूजल का स्तर लगभग पांच मीटर गिर रहा है। वर्ष 1999-2000 में सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने गिरते भूजल स्तर को लेकर जिले को संवेदनशील श्रेणी में रखा था। उनका कहना है कि यदि औद्योगिक क्षेत्रों में पाइपलाइन आधारित पेयजल आपूर्ति प्रणाली विकसित की जाए तो भूजल दोहन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तीन साल में तीन मीटर खिसक गया भूजल स्तर
‘सेव ग्राउंड वाटर’ अभियान से जुड़े विशेषज्ञ सुशील राघव के अनुसार, हजारों सबमर्सिबल पंपों के जरिये लगातार पानी निकाले जाने से भूजल स्तर पर भारी दबाव पड़ रहा है। भूजल विभाग के आंकड़ों की बात करें तो जिले में तीन साल में भूजल का स्तर करीब तीन मीटर खिसक चुका है। वर्ष 2022 में यह करीब 34 मीटर पर था, जो 2025 में 37 मीटर तक पहुंच गया है। वर्ष 1999-2000 में सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने गिरते भूजल स्तर को लेकर जिले को संवेदनशील श्रेणी में रखा था।
यूपीसीडा के डीजीएम सलिल यादव का कहना है कि जल संस्थान और जल निगम के जीएम से औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था कराने के लिए वार्ता की गई है। भूजल की जगह से पेयजल लाइन से पानी के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं।
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