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Ghaziabad News: जिम्मेदारी सोती रही, मजबूरी ने किया रतजगा

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साहिबाबाद। रात गहरी होती गई, लेकिन करहेड़ा की कई कॉलोनियों में लोगों की आंखों से नींद कोसों दूर रही। एक तरफ हिंडन नदी का पानी घरों की ओर बढ़ रहा था तो दूसरी तरफ लोग हाथों में फावड़े और मिट्टी की बोरियां लेकर अपने आशियाने बचाने में जुटे थे। लोग रातभर जागकर पानी की निगरानी करते रहे। किसी ने घर के आगे मिट्टी डालकर कच्चा बांध बनाया तो कोई गलियों में खड़े होकर पानी के रुख पर नजर रखता रहा। लोगों का आरोप है कि संकट की इस घड़ी में न कोई अधिकारी पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि हाल जानने आया।
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ऊधम सिंह कॉलोनी निवासी मनिकांत सिंह, जो चार माह पहले राजेंद्रनगर शिफ्ट हो चुके हैं, रातभर गायत्री गली में लोगों के साथ पानी रोकने का प्रयास करते रहे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 की बाढ़ में दो युवकों की मौत हुई थी, इसलिए इस बार किसी अनहोनी से बचने के लिए पूरी रात पहरा देना पड़ा।
एयरफोर्स से सेवानिवृत्त बृज विहार प्रसाद ने कहा कि शनिवार को कैबिनेट मंत्री आए थे, लेकिन हिंडन की ओर से ही निकल गए और काॅलोनी तक नहीं आए। उन्होंने नाराजगी जताई कि चुनाव के समय हर जनप्रतिनिधि घर तक आता है, लेकिन संकट की घड़ी में कोई नहीं पहुंचा। आरोप लगाया कि अधिकारी जलस्तर कम होने की बात करते रहे, जबकि कॉलोनियों में भर रहे पानी को देखने तक नहीं आए। रविवार को भी अधिकारियों की टीम बिजलीघर से ही लौट गई।
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केशव एन्क्लेव, केशवकुंज काॅलोनी व अन्य इलाकों में भी लोगों ने रातभर जागकर घरों के आगे कच्चे बांध बनाकर पानी रोकने की कोशिश की।लोगों ने कहा कि रात में न तो कोई कर्मचारी और न ही कोई जनप्रतिनिधि हाल जानने पहुंचा। स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि यह डूब क्षेत्र है और निर्माण अवैध हैं तो फिर नगर निगम ने यहां सड़क, बिजली, सीवर जैसी सुविधाएं क्यों उपलब्ध कराईं। उनका कहना है कि तीन वर्ष बाद भी प्रशासन स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है।
खुद कराई जलकुंभी की सफाई
सिटी फॉरेस्ट कॉलोनी और शिवम एन्क्लेव के लोगों ने पानी की निकासी के लिए अपने खर्च पर नदी और खेतों में फैली जलकुंभी हटवाई। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासन दूसरी ओर सफाई करा रहा था, इसलिए कॉलोनी के लोगों ने एक-एक हजार रुपये मिलाकर निजी स्तर पर सफाई कराई ताकि पानी का बहाव आसान हो सके।
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