भाषणों और कार्यक्रमों में शासन अपनी उपलब्धियां गिनवाता रहता है। उपलब्धियों में सबसे अधिक स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की बात कही जाती है, लेकिन उसकी सच्चाई कुछ अलग है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री द्वारा तीन जून को नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्रों के लोकार्पण के छह महीने बाद भी यह शुरू नहीं हो पाया है।
डासना में बने पोषण पुनर्वास के उद्घाटन के बाद से ही ताला लगा हुआ है। इसके अलावा आनन-फानन में शुरू हुए अन्य केंद्रों की भी कमोबेस यही स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा कई अन्य योजनाओं के भवन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। इनका लोकार्पण भी हो चुका है, मगर इसके बाद से ही यह भवन ऐसे ही सूने पडे़ हुए हैं।
करोड़ों खर्च होने के बाद भी सरकारी स्तर पर इस सुविधा का कोई लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
छह महीने पहले इनका किया था लोकार्पण:
- 60 बेड का वार्ड
- ब्लड बैंक भवन
- आधुनिक लॉउंड्री
- एमएमजी आईसीयू एवं वार्ड
- माड्यूलर किचेन
- माड्यूलर लाउंड्री
- मॉर्डन पोस्टमार्टम हाउस (शुरू हो चुका है, मगर आधुनिक उपकरण नहीं आए)
सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि ब्लड बैंक और पोषण केंद्र सहित अन्य यूनिट के लिए स्टाफ भर्ती प्रक्रिया चल रही है। अन्य के लिए उपकरण अभी शासन से आने बाकी हैं।