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रेन बसेरा लाइव नगर निगम के रेन बसेरे बदहाल

Tue, 06 Dec 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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तापमान लुढ़का - फोटो : अमर उजाला
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सर्दी बढ़ने के साथ लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। नगर निगम ने अभी तक शहर के रेन बसेरों की हालत को नहीं सुधारा है। रेन बसेरों के अंदर गंदगी पसरी है। गंदे और कटे-फटे गद्दे, टूटी खिड़कियां, पीने को पानी नहीं, शौचालय है पर इतना गंदा कि बीमारी पैदा कर दें। दूसरी और रेलवे स्टेशन पर पेड़ के नीचे रात गुजारने को लोग मजबूर हो रहे हैं।
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लोगों की इन्हीं परेशानियों को नजदीक से देखा अमर उजाला की टीम ने।रात बढ़ते ही सर्द हवाओं ने मौसम को अपनी आगोश में ले लिया। दिनभर मजदूरी और रिक्शा चलाने वाले लोगों का एकमात्र आश्रय स्थल यही रेन बसेरे होते हैं। प्रतिवर्ष नगर निगम इन रेन बसेरो की व्यवस्था करता है।

बाकायदा यहां पर टीवी, साफ-सफाई, साफ पानी, शौचालय के साथ सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है, लेकिन निगम यह व्यवस्था मौसम के शुरुआत में नहीं बल्कि सर्दी के चरम पर पहुंचने पर करता है।
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सीन- 1   (पुराना बस अड्डा, रेन बसेरा रात 9.10 बजे)
पुराने बस अडडे के पास स्थित रेन बसेरे में लगा ट्यूबवेल बीते दो माह से खराब पड़ा है। टीवी का भी यही हाल है। ठेकेदार के कर्मचारी चंदू ने बताया कि व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बताया गया पर कोई नहीं सुनता। वर्तमान में जो गददे और दरियां हैं उसी को बिछाकर मजदूरों को सुलाया जाता है। पानी के लिए बाहर से व्यवस्था करनी पड़ती है।

सीन-2  (रेलवे स्टेशन, रात 9.25 बजे)
रेलवे स्टेशन में रात का आलम यह था कि लोग पेड़ के नीचे सो रहे थे। जमीन पर पन्नी बिछाई और ऊपर रजाई ओढ़कर लेट गए। कुछ लोग टिन शेड के नीचे सो रहे थे। हवा तेज थी फिर भी लोग ठिठुरते हुए सो रहे थे।

सीन-3 (नासिर पुर फाटक, रेन बसेरा, रात 9.40 बजे)
नासिरपुर फाटक के पास स्थित रेन बसेरे में लोग गंदगी के बीच सो रहे थे। वहां पर गददे थे, लेकिन गंदे। इन गद्दो से बीमारी भी फैल सकती है। शौचालय बाहर बना है। इसकी सफाई भी शायद ही कभी की गई  हो। ऐसे रेन बसेरो की तरफ निगम अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा।

क्या कहते हैं  लोग
- गरीबों की सुविधा के बारे में कोई नहीं सोचता। बाहर से आया हूं और दिल्ली जाना है। रात में कैसे जाता। इसलिए रात रेलवे स्टेशन पर  ही बितानी पड़ रही है।  जगनेश
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- दिन भर मजदूरी करता है और रात यहां-वहां गुजारता हूं। गरीबों के लिए रेलवे स्टेशन ही घर होता है। सरकार को गरीबों के बारे में भी सोचना चाहिए। लल्लन
- रेन बसेरे में सुविधाएं नाममात्र की भी नहीं मिलती हैं। सर्दियां शुरू होने से पहले नगर निगम इन रेन बसेरे की हालत सुधार दे तो अच्छा रहता है। काजल
 
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