‘डीएम-एसएसपी की शिकायत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से की गई थी। दोनों ही अफसर पूरी तरह से उदासीन थे। पिछले दिनों अधिवक्ताओं के साथ भी डीएम-एसएसपी का व्यवहार उचित नहीं रहा था। इसी के चलते बार एसोसिएशन की ओर से सीएम को फैक्स भेजकर दोनों अफसरों शिकायत की गई थी।
सीएम योगी का आभार है कि उन्होंने ऐसे अफसरों को गाजियाबाद से चलता कर दिया।’ बृहस्पतिवार को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी काकड़ा और सचिव परविंदर नागर ने प्रेसवार्ता कर उक्त बातें बात कहीं।
बार पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विगत 17 अप्रैल को वकीलों ने एक प्रदर्शन के बाद डीएम को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम बनाया था। पूर्व में सूचना के बावजूद डीएम अपने कार्यालय से ही गायब हो गईं। उनके आवास पर फोन किया गया तो उन्होंने ज्ञापन लेने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को भेजने की बात कही।
करीब डेढ़ घंटे तक वकीलों का प्रतिनिधिमंडल सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में इंतजार करता रहा, मगर कोई नहीं आया। सिटी मजिस्ट्रेट को जब फोन किया गया तो उन्होंने ज्ञापन अपने पेशकार को देने की सलाह दे डाली। बार अध्यक्ष ने बताया कि तीन दिन पूर्व भी वकीलों का आंदोलन था।
इसकी पूरी रूपरेखा एलआईयू के माध्यम से डीएम को दे दी गई थी। प्रदर्शन के बाद जब अधिवक्ता ज्ञापन देने डीएम कार्यालय पर पहुंचे तो वह बाहर ही निकलकर नहीं आईं। उन्होंने अंदर जाने की कोशिश की तो वहां तैनात होमगार्ड ने वकीलों से अभद्रता कर दी। बाद में डीएम ने उलटा वकीलों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करा दी।
बार अध्यक्ष का दावा है कि डीएम और एसएसपी की शिकायत संबंधी एक फैक्स किया गया था। बुधवार रात जब इन दोनों अफसरों का ट्रांसफर हुआ तो सीएम आफिस से फोन पर उन्हें इसकी सूचना भी दी गई।
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फीस की फांस: बार एसोसिएशन का एलान, फीस मामले में पैरेंट्स के साथ
गाजियाबाद। फीस की फांस प्रकरण में बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने पैरेंट्स को हर संभव मदद करने की बात कही है। बार अध्यक्ष का कहना है कि पैरेंट्स अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और पुलिस-प्रशासन निजी स्कूल संचालकों के सामने पंगु बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि बुधवार को अपने हक केलिए प्रदर्शन कर रही महिला पैरेंट्स पर लाठीचार्ज करके पुलिस ने अपनी कायरता और खीज परिचय दिया है। इस मामले में वह पूरी तरह से पैरेंट्स केसाथ खडे़ रहेंगे। बार सचिव परविंदर नागर ने बताया कि बृहस्पतिवार को ही कुछ पैरेंट्स उनसे मिले थे।
उन्होंने आश्वासन दिया है कि जरूरत पड़ी तो वह गाजियाबाद पुलिस-प्रशासन के अफसरों केखिलाफ कोर्ट में 156/3 के तहत अर्जी देकर उन पर कार्रवाई की गुहार लगाई जाएगी।