गाजियाबाद। औद्योगिक शहर के रूप में पहचाने जाने वाले गाजियाबाद की पहचान अब धार्मिक विरासत से भी होगी। जिले के तीन प्राचीन मंदिरों को आस्था के केंद्र से आगे बढ़ाकर धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग ने योजना को मंजूरी देने के साथ करीब तीन करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। विकास कार्यों के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इनके इतिहास व धार्मिक परंपराओं से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दीपिका ने बताया कि सिहानी गांव का प्राचीन शिव मंदिर, निवाड़ी का चुकाए वाली माता मंदिर और मुरादनगर के असालत नगर स्थित हनुमान मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के लिए चुना गया है। इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से जरूरी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
150 वर्ष से अधिक पुराना है चार कुओं वाली माता का मंदिर
निवाड़ी गांव स्थित चुकाए माता मंदिर के विकास पर 75 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मंदिर के पुजारी तरुण मुदगल बताते हैं कि यह मंदिर 150 वर्ष से अधिक पुराना है। मान्यता है कि मंदिर के चारों ओर कुएं हुआ करते थे, इसलिए इसे पहले चार कुओं वाली माता का मंदिर कहा जाता था, जो बाद में चुकाए माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया। यहां वन दुर्गा माता की पूजा होती है। रविवार और नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
200 साल पुरानी मान्यता, अब मिलेगी नई पहचान
सिहानी गांव का प्राचीन शिव मंदिर भी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। पर्यटन विभाग यहां 1.13 करोड़ रुपये खर्च करेगा। मंदिर के पुजारी पुनीत शास्त्री बताते हैं कि मंदिर के करीब 200 वर्ष पुराने होने की मान्यता है। लोगों की मान्यता है कि मंदिर स्थापना से पहले इस स्थान पर गाय स्वयं दूध गिराती थी। इसके बाद यहां शिव मंदिर की स्थापना हुई।
हादसों से बचाव की मान्यता ने बनाया आस्था का केंद्र
मुरादनगर के असालत नगर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के विकास पर 95 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यहां रसोई सहित अन्य सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है। मंदिर के पुजारी आचार्य राजेश पांडेय के अनुसार, मान्यता है कि मंदिर स्थापना से पहले इस स्थान के आसपास सड़क हादसे अधिक होते थे। इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर वर्ष 1979 में मंदिर की स्थापना की। लोगों का विश्वास है कि मंदिर बनने के बाद हालात बदले। मंगलवार को यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।