गैस कंपनियां कामर्शियल और सब्सिडी सिलेंडर का रेट एक समान करने की प्लानिंग कर रही है। ऐसा हुआ तो उपभोक्ताओं को कामर्शियल रेट पर ही सिलेंडर मिलेगा। उसकी सब्सिडी धनराशि उनके अकाउंट में पहुंच जाएगी। हालांकि ऐसे उपभोक्ता जिन्होंने सब्सिडी छोड़ दी है, उनके सामने विकल्प होगा कि वह 14 किलो ग्राम का सिलेंडर लें या फिर 19 किलोग्राम का सिलेंडर।
आने वाले समय में गैस के क्षेत्र में काफी बदलाव होने जा रहे हैं। गैस डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के अध्यक्ष इरेश कुमार ने बताया कि वर्तमान में गैस कंपनियां सब्सिडी और कामर्शियल सिलेंडर के रेट अलग-अलग निर्धारित करती है। सब्सिडी सिलेंडर घरेलू कामकाज के उपयोग में आता है, लेकिन कई होटलों व रेस्टोरेंट में घरेलू सिलेंडर का ही उपयोग किया जाता है। कंपनियां इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर विचार कर रही है।
इसमें सब्सिडी और कामर्शियल सिलेंडर का रेट एक समान कर दिया जाएगा। इसके बाद सिलेंडर उपभोक्ताओं को दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उपभोक्ता कामर्शियल रेट देंगे। उसके बाद सब्सिडी की धनराशि उनके अकाउंट में जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि आधार कार्ड नंबर अकाउंट से लिंक हो। इसके बिना सब्सिडी मिलना संभव नहीं होगा।
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नहीं मिल रहा कनेक्शन, भटक रहे शहरी गरीब
हेडिंग: ‘उज्ज्वला’ योजना से दूर हैं गाजियाबादी
- गैस कंपनियों की भेजी गई पात्रों की लिस्ट में हैं गलतियां
- गाजियाबाद में 50 हजार पात्रों में से अब तक 50 को ही कनेक्शन
- लिस्ट में पात्र आवेदकों के नाम व पते गलत, कैसे मिले कनेक्शन
महानगर के शहरी गरीब लोगों को ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ का लाभ नही मिल पा रहा है। कनेक्शन के लिए गैस कंपनियों की ओर से भेजी गई पात्रों की लिस्ट में तमाम गलतियां हैं। 2011 की इस पुरानी लिस्ट में आवेदकों के नाम और पते गलत हैं। ऐसे में बीपीएल और अंत्योदय कार्ड धारक गैस कनेक्शन के लिए एजेंसियों और विभागीय कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ शुरू की है। योजना के तहत आवेदक को बिना सिक्योरिटी मनी के ही कनेक्शन दिया जाएगा। चूल्हा, रेगुलेटर और रबर के पैसों को बुकिंग के बाद मिलने वाली सब्सिडी की धनराशि से काटा जाएगा। गैस डिस्ट्रीब्यूटर इरेश कुमार ने बताया कि बीपीएल और अंत्योदय कार्ड धारक ोंके साथ ही गरीब महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन दिया जाना है।
शहर में जो पात्र लोग हैं उनका नाम गैस कंपनी से मिली लिस्ट में नहीं है। लिस्ट में जिन लोगों का नाम है वह अब संबंधित पते पर नहीं रहते। हॉकर दिए गए पते पर जाते हैं तब पता चलता है कि वह व्यक्ति यहां से छोड़ कर जा चुका है। उन्होंने बताया कि कंपनी की लिस्ट में 50 हजार लोगों के नाम है। इसमें करीब 60 प्रतिशत लोग दिए गए पते पर रहते ही नहीं। इसलिए शहरी क्षेत्र में केवल 50 कनेक्शन ही वितरित किए गए हैं। लिस्ट और वर्तमान पात्र लोगों का मिलान नहीं हो पा रहा है।
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