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Ghaziabad News: राजनगर एक्सटेंशनः बसावट के 16 साल बाद भी नहीं बिछी पेयजल लाइन, 240 फीट नीचे गया भूजल

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गाजियाबाद। करीब 16 साल पहले बसाए गए राजनगर एक्सटेंशन में आज तक पाइपलाइन के जरिये पानी की आपूर्ति की योजना नहीं बन सकी है। परिणामस्वरूप पूरे इलाके में अवैध बोरवेल के जरिये भूजल का अंधाधुंध दोहन हो रहा है और जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। स्थानीय आरडब्ल्यूए और एओए पदाधिकारी वर्षों से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन विभाग और जनप्रतिनिधियों की ओर से ठोस पहल नहीं दिखी।
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फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन सोसायटी के अध्यक्ष सचिन त्यागी के मुताबिक, वर्ष 2010 से विकसित हो रहे इस इलाके में आज 70 से अधिक बहुमंजिला सोसायटियां हैं। दो लाख से अधिक आबादी यहां रहती है। इसके बावजूद पाइपलाइन से जलापूर्ति की कोई योजना तक नहीं बनी।

उन्होंने बताया कि अवैध बोरवेल के चलते जलस्तर 240 फीट तक गिर चुका है। कई बार जीडीए और जनप्रतिनिधियों से मिले और क्षेत्र में गंगाजल की आपूर्ति की मांग की लेकिन हर बार फाइल आगे बढ़ाने का आश्वासन ही मिला। अब इस मुद्दे को अभियान बनाने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।
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सब जगह आया गंगाजल, यहां क्या दिक्कत
गौर कैस्केड सोसायटी के पूर्व सचिव पुनीत गोयल सवाल उठाते हैं कि जब वसुंधरा, सिद्धार्थ विहार और इंदिरापुरम जैसे इलाकों में गंगाजल पहुंच सकता है तो राजनगर एक्सटेंशन में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि पास में मुरादनगर गंगनहर होने के बावजूद यहां आपूर्ति नहीं होना योजना की विफलता है। क्षेत्र में 300 से ज्यादा अवैध बोरवेल चल रहे हैं, जबकि एनजीटी इस पर रोक लगा चुका है। सोसायटी महासचिव अभिनव त्यागी के अनुसार, बड़े रिहायशी प्रोजेक्ट्स में रोजाना लाखों लीटर पानी की खपत होती है। उन्होंने बताया कि स्विमिंग पूल से लेकर घरेलू उपयोग तक पूरा भार भूगर्भ जल पर है, जिससे गर्मियों में संकट और गहराता है।

अधिकारी बोले
भूगर्भ जल की घरेलू आपूर्ति पर कोई जुर्माना नहीं है, लेकिन जल प्रयोग की एक सीमा है। इसके लिए एनओसी लेना अनिवार्य है। एनओसी नहीं लेने वालों पर जुर्माना लगाया गया था। हालांकि, कुछ संशोधन होने वाले हैं, इसलिए इस समय एनओसी बंद है। अभी कोई जुर्माना नहीं लग रहा है। औद्योगिक या अन्य कामों में पानी के प्रयोग पर दो से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना है।

- सृष्टि जायसवाल, भूगर्भ अधिकारी

राजनगर एक्सटेंशन में गंगाजल की आपूर्ति देने के लिए आज तक कोई योजना नहीं बनी। यह काम सिंचाई विभाग का है। हम सिंचाई विभाग को इस संबंध में पत्र लिखेंगे, क्योंकि यह क्षेत्र जीडीए के अंतर्गत आता है।
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-आलोक रंजन, मुख्य अभियंता, जीडीए
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आंकड़ों पर एक नजर राजनगर एक्सटेंशन
आबादी- दो लाख
बहुमंजिला इमारतें- 70 से अधिक
अवैध बोरवेल- 300 से अधिक
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