एमएमजी अस्पताल में 200 बेड के नए अस्पताल भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तकनीकी टीम ने अस्पताल परिसर का सर्वे किया। इस दौरान पुराने महिला अस्पताल, सीएमओ और सीएमएस आवास तथा नर्सिंग हॉस्टल की भी पैमाइश और मजबूती की जांच की गई। नया भवन बनाने के लिए शासन स्तर से 80 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं।
अस्पताल के मौजूदा भवन का निर्माण 69 वर्ष 1956 में तहसील स्तर के रूप में हुआ था। इमारत अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। वर्ष 2018 में पीडब्ल्यूडी ने इसे निष्प्रोज्य घोषित कर दिया था लेकिन नया भवन नहीं होने से जर्जर इमारत की मरम्मत कर अस्पताल संचालित किया जा रहा है। मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा को देखते हुए शासन ने जनवरी 2023 में 200 बेड के नए अस्पताल भवन बनाए जाने की स्वीकृति दी थी। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी मेरठ पीडब्ल्यूडी खंड को सौंपी गई है।
अभी तक टीबी अस्पताल, टाइप-2, 3 व 4 के आवासीय भवनों को तोड़ने की ही अनुमति मिली है। पुराने महिला अस्पताल का जर्जर भवन, सीएमओ और सीएमएस आवास, डॉक्टरों के फ्लैट्स और नर्सिंग हास्टल को निष्प्रोज्य घोषित नहीं किया गया है। मंगलवार को लोक निर्माण विभाग की टीम ने तीनों बिल्डिंगों का सर्वे करने के साथ ही उनकी पैमाइश की। तीन सदस्यीय तकनीकी टीम ने इन इमारतों की स्थिति का मूल्यांकन किया।
जर्जर इमारतों के प्लास्टर गिरने से कई बार हो चुके हादसे
अस्पताल की जर्जर इमारतों की छत से आए दिन प्लास्टर गिरने से कई बार हादसे हो चुके हैं। इसमें कई स्वास्थ्यकर्मी घायल हो चुके हैं। कई बार अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो चुकी हैं। इसको लेकर शासन को कई बार पत्राचार हो चुका है। अब नया भवन बनने से मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।
एमएमजी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की टीम अस्पताल परिसर की गैर निष्प्रोज्य घोषित बिल्डिंग का तकनीकी मुआयना करने आई थी। सर्वे और पैमाइश के बाद टीम वापस लौट गई। रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजेगी इसके बाद तोड़ने का काम शुरू होगा।