नगर निगम और जिला प्रशासन एनजीटी के आदेश पर तालाबों की खुदाई तो करा रहा है, लेकिन इनमें पानी कहां से आएगा इसका इंतजाम नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से शहर का सबसे बड़ा और पौराणिक महत्व रखने वाला पक्का तालाब बिना पानी के छह साल से सूखा पड़ा है। पांच करोड़ रुपये का भारी-भरक म फंड खर्च करने के बावजूद इसमें पानी भरने का इंतजाम नहीं किया गया।
अब यही हालात आबादी के बीच आ चुके अन्य तालाबों की भी हो जाएगी।किसी समय में गांवों के घरों से निकलने वाला वेस्ट पानी तालाबों में पहुंचता था और यह ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने का सबसे बड़ा और सुलभ तरीका था। अब शहरों में तब्दील हो चुके ग्रामीण क्षेत्रों के घरों का पानी सीधे सीवर लाइनों में पहुंचता है। यानी तालाबों को भरने का एक साधन खत्म हो गया है।
बड़े नालों को तालाबों में डाला नहीं जा सकता है। ऐसे में तालाबों का अस्तित्व सिर्फ बरसाती पानी पर टिका है। बारिश का करीब 80 फीसदी पानी भी नालों के जरिए हिंडन में पहुंच रहा है। ऐसे में बरसात के सहारे भी इन तालाबों को जिंदा रख पाना संभव नहीं है।
ट्यूबवेलों से तालाब भरने पर विरोध
नगर निगम ने रमते राम रोड स्थित पक्का तालाब को भरने के लिए 30 एचपी का नलकूप लगाने की प्लानिंग की थी, लेकिन इस पर जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं ने विरोध कर दिया। जल बिरादरी और अरण्या संस्था के पदाधिकारियों का कहना था कि जमीन से पानी निकालकर तालाब के सहारे फिर जमीन में पहुंचाने का कोई मतलब नहीं है।
तालाबों का काम बारिश और घरों से निकलने वाले पानी को फिर से जमीन में पहुंचाने का है।
पक्का तालाब पर रामलीला मंचन की थी प्लानिंग
रमते राम रोड स्थित पक्का तालाब में रामलीला मंचन के दौरान राम-केवट संवाद का मंचन किया जाता था। राम-लक्ष्मण बने कलाकार तालाब में नौका विहार करते थे। बाद में यह बंद कर दिया गया था। पूर्व महापौर स्व. दमयंती गोयल ने इस मंचन को पुन: शुरू कराने के लिए पक्का तालाब का सौंदर्यीकरण कराने की प्लानिंग की थी। इसे पिकनिक स्पॉट के रूप में डेवलप किया जाना था।
एसटीपी के पानी का हो सकता है इस्तेमाल
तालाबों को भरने में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। नगर निगम सीमा में इंदिरापुरम और डूंडाहेड़ा में चार एसटीपी बने हुए हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 256 एमएलडी सीवरेज का शोधन किया जा रहा है। ट्रीटमेंट के बाद इस पानी को नालों में बहाया जा रहा है। निगम और जिला प्रशासन चाहे तो इस शोधित पानी का इस्तेमाल तालाबों को भरने के लिए किया जा सकता है।