गाजियाबाद। पिछले पांच साल में महिला थाने में दर्ज कराए गए तीन तलाक के 25 केस में से 16 पुलिस जांच में झूठे पाए गए। केस दर्ज कराने वाली महिलाओं साक्ष्य और गवाह नहीं दे पाएं। इन सभी में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल बंद कर दी। सिर्फ आठ मामले ही ऐसे रहे जो सही पाए गए। इन सभी में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है, जबकि पिछले साल के एक मामले में अभी विवेचना जारी है।
झूठे पाए गए 16 केस में आधे से ज्यादा ऐसे हैं, जिनमें बताया गया कि तीन तलाक फोन पर काॅल करके या व्हाट्सएप के माध्यम से दिया गया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन तीन तलाक दिया जाना जांच में साबित नहीं हो सका। पुलिस ने शौहर के बयान दर्ज किया तो उसने तलाक देने की बात के इन्कार किया। महिला व्हाट्स एप और फोन काॅल के साक्ष्य नहीं दे सकी। इस पर पुलिस ने मान लिया कि तीन तलाक का केस बनाने के लिए तहरीर में झूठा आरोप लिख दिया गया।
ऐसे भी मामले निकले जो मारपीट और घर से निकाल देने के थे लेकिन तहरीर में तीन तलाक देना लिखवाया गया। इनसे इतर आठ मामले ऐसे रहे जिसमें पुलिस को तीन तलाक दिए जाने के गवाह मिले। मौके पर मौजूद रहे लोगों ने इसकी गवाही दी। केस दर्ज कराने वाली महिलाओं ने फोन काॅल और व्हाट्सएप पर तलाक दिए जाने की जो जानकारी तहरीर में दी थी, उसके साक्ष्य भी पुलिस को दिए।
तीन तलाक में गहनता से जांच
महिला थाने में दर्ज तीन तलाक के मामलों के बारे में डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि तीन तलाक के मामलों की जांच गहनता से की जाती है। ऐसे भी केस आए हैं जिसमें पति पर तलाक देने के साथ ही जेठ, देवर, ससुर और ससुराल के अन्य लोगों पर मारपीट, घर से निकालने, दहेज के लिए प्रताड़ना के आरोप हैं। साक्ष्य मिलने पर ही पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल की जाती है।
2018 में लागू हुआ कानून
तीन तलाक कानून 19 सितंबर 2018 से लागू हुआ। इस कानून के तहत तीन तलाक बोलना गैरकानूनी है। तीन तलाक को संज्ञेय अपराध माना जाएगा, जिसके लिए अधिकतम तीन वर्ष का कारावास और जुर्माना हो सकता है। केवल पत्नी या उसके रक्त संबंधी द्वारा पुलिस में की गई शिकायत को ही मान्यता दी जाएगी। यह अपराध गैर-जमानती है, यानी केवल मजिस्ट्रेट ही जमानत दे सकता है, पुलिस नहीं। पत्नी की बात सुनने के बाद ही जमानत दी जा सकती है।
पांच साल में आए मामले
वर्ष मुकदमे एफआर चार्जशीट
2020 आठ सात एक
2021 पांच तीन दो
2022 नौ छह तीन
2023 दो 00 दो
2024 एक विवेचना जारी