दिल्ली में डेंगू से दो लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने यहां भी अलर्ट जारी कर दिया है। दावे किए जा रहे हैं कि डेंगू-मलेरिया से निपटने के पूरे इंतजाम हैं लेकिन सरकारी अस्पताल में पिछले चार महीने से प्लेटलेट्स सेपरेटर मशीन खराब पड़ी है। ऐसे में यदि मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ी तो उसे प्राइवेट ब्लड बैंक जाना होगा, जहां उससे 10 से 15 हजार रुपये वसूले जाएंगे।
शासन से मशीन ठीक कराने के लिए बजट नहीं आया है। इस मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एके दुआ ने बताया कि शासन को इसके बारे में कई बार अवगत कराया जा चुका है। शहर में करीब नौ ब्लड बैंक हैं। इनमें से एक सरकारी है बाकी प्राइवेट हैं। सरकारी अस्पताल के बाद प्लेटलेट्स के लिए प्राइवेट ब्लड बैंक और अस्पतालों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
प्राइवेट अस्पतालों में प्लेटलेट्स के जंबो पैक के दाम दस हजार से 15 हजार तक हैं जबकि सरकारी अस्पताल में एक यूनिट प्लेटलेट्स दो सौ रुपये में मिलता है। डॉ. अंशुल वार्ष्णेय ने बताया कि सिर्फ डेंगू में ही नहीं मलेरिया और हाई फीवर में भी शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। डेंगू के खतरनाक स्टेज में जब प्लेटलेट्स 30 हजार से नीचे जाने लगता है तब प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है।
प्लेटलेट्स निकालने के दो तरीके हैं। होल ब्लड में मरीज का पूरा ब्लड लिया जाता है, जिसमें से खून से प्लेटलेट्स अलग किया जाता है। इस तरह लिए गए एक यूनिट खून से 5000 हजार प्लेटलेट्स निकलते हैं। दूसरा तरीका है सिंगल डोनर द्वारा इसे जंबो पैक भी कहा जाता है। इसमें ब्लड न लेकर खून से प्लटलेट्स निकाल लिया जाता है। बाकी खून शरीर में रह जाता है।
जंबो पैक के लिए करीब दो से ढाई लीटर खून की जरूरत होती है, जिसमें साठ हजार प्लेटलेट्स निकलता है। मुश्किल से मिलते हैं ये ब्लड ग्रुप
- ए निगेटिव
- बी निगेटिव (ज्यादा मुश्किल)
- एबी निगेटिव
- ओ निगेटिव (सबसे मुश्किल)
दिल्ली में डेंगू से दो मौत, यहां भी अलर्ट
दिल्ली में डेंगू से दो की मौत के बाद गाजियाबाद में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो चुका है। अभी तक डेंगू सर्वे अभियान में तीन हजार से अधिक स्थानों पर लगभग आठ सौ जगहों पर डेंगू के लार्वा मिले हैं। अभी तक सरकारी अस्पताल में लगभग 30 डेंगू के संदिग्ध मरीज आ चुके हैं जिनमें से सभी की रिपोर्ट निगेटिव बताई गई है।