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Ghaziabad News: वैवाहिक विवाद में दर्ज मामले की चुनौती की निगरानी याचिका खारिज

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गाजियाबाद। वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में आरोपियों की ओर से निचली अदालत के समन आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल निगरानी याचिका को अपर सत्र न्यायाधीश मनीष निगम की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत की ओर से चार अक्तूबर 2024 को पारित आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि आदेश में किसी तरह की कानूनी त्रुटि नहीं है। मामला रमजीत सिंह जंडू की ओर से गुरनिंदर कौर और उनके परिजनों के खिलाफ दाखिल परिवाद से संबंधित था।
मेरठ निवासी गुरनिंदर कौर, परमजीत सिंह कलसी, हरजीत कौर, अमरजीत सिंह कलसी और भोली उर्फ कुलविंदर कौर की ओर से यह निगरानी याचिका दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि रमजीत सिंह जंडू ने वैवाहिक विवाद के चलते उन्हें झूठे मामले में फंसाया है। याचिका में निचली अदालत के समन आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी।
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मामले के अनुसार रमजीत सिंह और गुरनिंदर कौर का विवाह नवंबर 2020 में हुआ था। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर वैवाहिक विवाद के दौरान मारपीट, उत्पीड़न और धमकी के आरोप लगाए गए। रमजीत सिंह का आरोप था कि फरवरी 2022 में वह अपने पिता के साथ गुरनिंदर कौर को लेने उसके मायके गए थे, जहां उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई। इसके बाद उनके घर पहुंचकर भी मारपीट और तोड़फोड़ किए जाने का आरोप लगाया गया। वहीं, गुरनिंदर कौर की ओर से इन आरोपों का खंडन करते हुए ससुराल पक्ष पर दहेज की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। याचिका में यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ दर्ज मामले से बचने और दबाव बनाने के लिए रमजीत सिंह ने परिवाद दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान गुरनिंदर कौर की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच वैवाहिक विवाद आपसी बातचीत और समझौते से समाप्त हो चुका है। दोनों ने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध खत्म करने के लिए मेरठ परिवार न्यायालय में तलाक की कार्यवाही भी शुरू कर रखी है। इसी आधार पर निगरानी याचिका वापस लेने की इच्छा जताई गई। अपर सत्र न्यायाधीश मनीष निगम ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद कहा कि निचली अदालत ने परिवादी के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपियों को तलब किया था। अदालत ने निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई और निगरानी याचिका खारिज करते हुए चार अक्तूबर 2024 के आदेश को बरकरार रखा।
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