गाजियाबाद। नोटबंदी के बाद प्लास्टिक मनी का चलन बढ़ा है, ऐसे में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़ने लगे हैं। आठ नवंबर के बाद से 20 दिसंबर तक साइबर सेल के पास 52 मामले ऑनलाइन फ्रॉड केआए हैं, जिनमें 10 लाख से ज्यादा की ठगी की गई है। हालांकि इनमें से कुछ रुपये बैंक के जरिए साइबर सेल ने वापस भी कराए हैं।
ठग बैंककर्मी बनकर लोगों को कॉल करते हैं। इसके बाद उनसे कहते हैं कि उनका एटीएम कार्ड एक्सपायर होने वाला है। कार्ड रिन्यू करने का झांसा देकर वह लोगों से उनका कार्ड नंबर और पिन मांग लेते हैं। इसके बाद एकाउंट से ठगी की जाती है।
इस संबंध में साइबर सेल के प्रभारी सुरेश चंद बेलवाल ने बताया कि ऑनलाइन ठगी करने वाले फर्जी आईडी पर लिए गए सिम कार्ड केजरिए कॉल कर और एटीएम या डेबिट कार्ड का क्लोन बनाकर वारदात करते हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे में ठगों को तुरंत पकड़ना तो बेहद मुश्किल है, लेकिन ऑनलाइन फ्रॉड के रुपये वापस कराए जा सकते हैं। दरअसल, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन 72 घंटे के बाद किया जाता है। इसके अलावा ट्रांजेक्शन के तीन गेटवे होते हैं, जिन पर उसे होल्ड कराया जा सकता है।
लिहाजा अगर 24 घंटे के भीतर साइबर सेल को सूचना मिल जाए तो रकम वापस कराना संभव है। उन्होंने बताया कि लोगों से अपील है कि वे अपना डेबिट-क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर किसी से शेयर न करें। ठगी से बचने के तरीका यही है कि किसी को भी अपने बैंक संबंधी कार्ड या अकाउंट से संबंधित जानकारी न दें।
बुधवार शाम को ही जनकपुरी निवासी शांति देवी के मोबाइल पर कॉल कर उनके एटीएम को रिन्यू करने का झांसा देकरउनके बैंक एकांउट से पांच हजार की ऑनलाइन खरीदारी की गई। मंगलवार को खोड़ा निवासी युवक के एकाउंट से ठगों ने 10 हजार रुपये उड़ा लिए थे।
इसी तरह जिन अन्य लोगों से ठगी की गई है, उनमें सिहानी गेट क्षेत्र के चेतन, सरिता, सुशीला, कविनगर के सुशील आदि हैं। इनसे 10 हजार से लेकर 70 हजार तक ठगी की गई है। इन सभी लोगों को मोबाइल पर आए एसएमएस के जरिए पता चला कि इनके एकाउंट से रकम निकाली गई है।