एनसीआर में डेंगू-चिकनगुनिया कहर बरपा रहा है वहीं प्राइवेट अस्पतालों से शिकायतें मिली हैं कि वे मरीजों का सही से इलाज नहीं कर रहे हैं। मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटा रहे हैं।
इन शिकायतों के बाद अब सीएमएस ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन गाजियाबाद, ट्र्रांस हिंडन और मोदीनगर को निर्देशित किया है कि सभी प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम्स डेंगू-चिकनगुनिया के मरीजों का उचित इलाज करें।
सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि कई जगहों से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि प्राइवेट अस्पताल वाले मरीजों का उचित इलाज नहीं कर रहे हैं। कई बार मरीजों को अस्पताल से वापस लौटा रहे हैं। उन्होंने आईएमए अध्यक्षों से कहा है कि वह अपने-अपने स्तर से सभी अस्पतालों को यह दिशा-निर्देश जारी करें।
पत्र के अनुसार मरीजों को अस्पताल से वापस न लौटाया जाए और जैसे भी संभव हो इलाज जरूर दिया जाए।
पांच सौ के पार हुआ डेंगू-चिकनगुनिया के मरीजों का आंकड़ा
शुक्रवार को चिकनगुनिया के 77 सैंपल की जांच हुई, जिसमें से 21 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके अलावा 45 डेंगू के सैंपल की जांच हुई है जिसमें से छह मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनको मिलाकर चिकनगुनिया के कुल 334 और डेंगू के181 मरीज हो गए हैं।
रहस्यमय बुखार भी जानलेवा
डेंगू-चिकनगुनिया के साथ-साथ रहस्यमय बुखार भी जानलेवा हो रहा है। शहर ही नहीं मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी क्षेत्र से भी मौत की सूचनाएं आ रही हैं। ऐसे में सावधानी ही एकमात्र बचाव है।हाई फीवर के बाद अधिकतर मौतों में ब्रेन हेमरेज की समस्या पाई गई है।
फिजिशियन डॉ. अंशुल वार्ष्णेय का कहना है कि हाई फीवर में ब्रेन हैमरेज की समस्या उन्हें आती है, जो पहले से किसी न किसी बीमारी या ब्रेन एन्यूरिज्म के शिकार हों या जिनके ब्रेन में ब्लड वेसल्स के गुच्छे बने हों।
वार्ष्णेय का कहना है कि बुखार होते ही सबसे पहले पैरासिटामोल लें। हाई फीवर की स्थिति में ठंडे पानी की पट्टियां रखें। इससे बुखार कम हो जाता है। पैरासिटामोल लेने के बाद यदि बुखार न उतरे तो डॉक्टर को दिखाएं। अपनी समझ से कोई अन्य दवा न लें, यह घातक हो सकता है।
बुखार आने पर क्या करें
- छह-छह घंटे पर पैरासिटामोल लें
- ठंडे पानी की पट्टी करें
- उसके बाद भी बुखार न उतरे तो ठंडे पानी से नहा लें
- तरल पदार्थ का सेवन करें
- प्लेटलेट्स कम न होने दें