गाजियाबाद। आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले कार्डधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में योजना से जुड़े 82 निजी अस्पतालों में अलग-अलग बीमारियों के इलाज की अनुमति है। ऐसे में मरीजों को अस्पतालों में उपलब्ध उपचार की जानकारी नहीं मिल पाने के कारण एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई मरीजों को आखिरकार सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने कार्डधारकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल संचालकों को निर्देश जारी करने की तैयारी की है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्डधारकों को निर्धारित बीमारियों के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि, जिले के सभी संबद्ध अस्पतालों में हर बीमारी का उपचार संभव नहीं है। अस्पतालों को अलग-अलग बीमारियों के लिए अनुमति मिली हुई है। ऐसे में मरीजों को संबंधित बीमारी के उपचार के लिए अधिकृत अस्पताल की जानकारी नहीं मिल पाती। इसके चलते उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
अगस्त में 21 अस्पताल पैनल से किए गए बाहर
आयुष्मान योजना के तहत इलाज में अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद अगस्त में 21 अस्पतालों को योजना के पैनल से बाहर कर दिया गया था। शासन स्तर पर की गई कार्रवाई में सामने आया था कि संबंधित अस्पताल केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित 35 मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। एंटी फ्रॉड यूनिट के डाटा एनालिटिक्स और शिकायतों के आधार पर हुई जांच में कई तरह की गड़बड़ियां उजागर हुई थीं।
अस्पतालों को जारी होंगे नोटिस
आयुष्मान योजना की नोडल अधिकारी डॉ. नेहा गोस्वामी ने बताया कि बुधवार को हुई बैठक में कार्डधारकों की आभा आईडी बनाने और मरीजों को सुगम इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने कहा कि कार्डधारकों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योजना से जुड़े अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। किसी भी स्थिति में मरीज को वापस नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्डधारकों से अपील की कि इलाज के दौरान यदि कोई अस्पताल अतिरिक्त भुगतान मांगता है तो इसकी शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में करें।