गाजियाबाद। नामचीन दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं बनाने वाले गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। स्वाट टीम ने देहरादून में छापेमारी कर एक मकान में संचालित नकली दवा फैक्टरी पकड़ी है। यहां से करोड़ों रुपये कीमत की नकली दवाएं बरामद की गई हैं। कार्रवाई फैक्टरी संचालक की गाजियाबाद के एक होटल से गिरफ्तारी के बाद की गई।
एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि लखनऊ के थाना अमीनाबाद में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से उत्तराखंड में संचालित नकली दवा फैक्टरी से देशभर में दवाओं की आपूर्ति किए जाने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। बुधवार सुबह मुखबिर से सूचना मिली कि नकली दवाओं की आपूर्ति से जुड़ा रुड़की निवासी राजेंद्र उर्फ अरुण टूंडा दुहाई स्थित एक होटल में छिपा हुआ है।
सूचना के आधार पर स्वाट टीम ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने देहरादून स्थित अपनी फैक्टरी के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस और विभागीय टीम देहरादून के परवाल क्षेत्र में देवीपुर न्यू हाईवे रोड स्थित एक मकान में पहुंची।
मकान पर उत्तरांचल मेडिकल इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च फाउंडेशन का बोर्ड लगा हुआ था। जांच के दौरान वहां नामचीन दवा कंपनियों के नाम से नकली दवाएं तैयार होती मिलीं। कार्रवाई के दौरान देहरादून के थाना बसंत विहार की पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर भी मौजूद रहे।
इन कंपनियों के नाम से तैयार हो रही थीं नकली दवाएं
एडीसीपी अपराध ने बताया कि फैक्टरी से सिप्ला, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज, एल्डर, माइक्रो, मैनकाइंड, इंटास, एबॉट, सन फार्मा, एरिस्टो, मैकलियोड्स और जाइडस समेत कई नामचीन कंपनियों के नाम से तैयार नकली दवाएं बरामद हुई हैं। बरामद दवाओं की बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और देशभर में इसकी सप्लाई के बारे में जानकारी जुटा रही है।
स्वाट टीम ने नकली दवाई पकड़ी।- फोटो : Archive