गाजियाबाद। एकमुश्त कर प्रणाली लागू होने के बाद जिले में एक हजार से अधिक व्यावसायिक वाहनों की रफ्तार थम गई है। वाहन स्वामियों का कहना है कि एक साथ लाखों रुपये की कर राशि जमा करना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है। कर जमा न होने से वे अपने वाहनों की फिटनेस, प्रदूषण जांच और अन्य जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई के डर से वाहन सड़कों पर उतारने के बजाय खड़े करने पड़ रहे हैं।
शासन ने 30 जनवरी से सभी श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों के लिए एकमुश्त कर प्रणाली लागू की है। नए के साथ पुराने वाहनों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है। पहले त्रैमासिक और वार्षिक कर जमा करने की व्यवस्था थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता संदीप त्यागी ने बताया कि पहले किस्तों में कर जमा करना आसान था। अब एकमुश्त बड़ी राशि की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है। कर जमा किए बिना फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी नहीं हो रहे हैं। अगर वाहन नियम पूरे किए बिना सड़क पर उतरता है तो जुर्माना व जब्ती की कार्रवाई हो सकती है।
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10 वाहनों के लिए 15 लाख जुटाना मुश्किल
गोविंदपुरम निवासी ट्रांसपोर्टर आलोक तोमर ने बताया कि उनके पास 10 व्यावसायिक वाहन हैं। नया वाहन खरीदते समय लोन की व्यवस्था हो जाती है, लेकिन अब पुराने वाहनों के फिटनेस और प्रदूषण जांच के लिए पहले एकमुश्त कर जमा करना अनिवार्य है। इसके लिए 15 लाख रुपये से अधिक की जरूरत है, जो मौजूदा हालात में जुटा पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पहले ही मंदी से जूझ रहा है। एकमुश्त कर व्यवस्था ने परेशानी और बढ़ा दी है। बिना कर जमा किए वाहन चलाने पर भारी जुर्माना या जब्ती का खतरा है, इसलिए फिलहाल वाहनों को खड़ा करना ही एकमात्र विकल्प है।
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विभाग का पक्ष
एआरटीओ प्रशासन अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रांसपोर्ट यूनियन के साथ बैठक हो चुकी है और उन्हें नई व्यवस्था के फायदे समझाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, एकमुश्त कर प्रणाली से वाहन स्वामियों को बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पुराने वाहनों पर छूट का प्रावधान भी रखा गया है।
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आज जंतर-मंतर पर धरना
एकमुश्त टैक्स प्रणाली के विरोध में एनसीआर के ट्रांसपोर्टर 28 फरवरी को दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देंगे। ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता संदीप त्यागी ने बताया कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि सरकार ने नियमों में संशोधन नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।