स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल करने के लिए नगर निगम ने अब पुराने शहर में घंटाघर एरिया के बजाए दिल्ली से सटे टीएचए के एरिया को स्मार्ट बनाने का फैसला लिया है। नगर निगम की प्लानिंग शनिवार को लखनऊ में हुई उच्चाधिकारियों की बैठक में बदल गई।
गाजियाबाद की एतिहासिक पृष्ठभूमि संजोए घंटाघर के आसपास वाले क्षेत्र को दरकिनार करते हुए बीते वर्ष चिन्हित किए गए टीएचए क्षेत्र को ही स्मार्ट सिटी प्रपोजल में शामिल किया जाएगा।स्मार्ट सिटी मिशन का तीसरा चरण शुरू हो चुका है।
नगर निगम इस बार भी बीते साल की तरह ‘एरिया बेस्ड डेवलपमेंट’ के लिए टीएचए के दिल्ली से सटी कालोनियों को चिन्हित करेगा। अब कंसलटेंट फर्म संबंधित क्षेत्र के लिए डेवलपमेंट की योजनाएं बनाकर स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करेगी।
बीते साल नगर निगम ने स्मार्ट सिटी मिशन के लिए वैशाली, कौशांबी, आंशिक महाराजपुर व साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र का 1078 एकड़ का क्षेत्र ‘एरिया बेस्ड डेवलपमेंट’ के लिए चिन्हित किया था। कंसलटेंट फर्म और निगम अफसरों ने 1897 करोड़ रुपये से स्मार्ट सिटी में विभिन्न योजनाओं को लागू करने का खाका तैयार किया था।
गाजियाबाद दूसरे चरण में भी स्मार्ट सिटी की लिस्ट में जगह नहीं बना पाया था। अब शनिवार को लखनऊ में रीजनल सेंटर फॉर अरबन इन्वायरमेंट स्टडीज (आरसीयूईएस) के अपर निदेशक ने स्मार्ट सिटी मिशन के लिए दावेदार शहरों के अधिकारियों और कंसलटेंट फर्म की मीटिंग बुलाई गई थी।
गाजियाबाद से निगम के अधिशासी अभियंता व स्मार्ट सिटी के सहायक नोडल अधिकारी एसएस चौहान और कंसलटेंट फर्म केपीएमजी के एक्सपर्ट शामिल हुए। उन्होंने आरसीयूईएस के अपर निदेशक एके गुप्ता के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया। एसएस चौहान ने बताया कि इस बार स्मार्ट सिटी के लिए नया क्षेत्र चिह्नित नहीं किया जाएगा।
पुराने क्षेत्र में ही थोड़ा फेरबदल किया जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है।गाजियाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने का सारा दारोमदार टीएचए पर है, लेकिन यहां की कालोनियों में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था चौपट है।
ऑटो और प्राइवेट बसें उन्हीं रूटों पर चलते, जहां पर कमाई है। कई रूट निर्धारित होने के बाद भी उन रूटों पर ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं है। इसके साथ ही लोग बिजली, पानी, सड़क, कूड़ा, गंदगी आदि समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं।
इलाके की आरडब्ल्यूए का कहना है कि अगर प्रशासन और विभागीय अधिकारी बेहतर सुविधाओं के लिए कदम उठाए तो ही गाजियाबाद स्मार्ट सिटी बनेगा। आरडब्ल्यूए का आरोप है कि स्मार्ट सिटी के प्रपोजल को लेकर शुरुआत से ही नगर निगम का रवैया गंभीर नहीं रहा।
निर्देश मिले थे कि लोगों के सुझावों 0 के आधार पर प्रपोजल तैयार कराया जाए, लेकिन निगम ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।
स्मार्ट सिटी क्या है
स्मार्ट सिटी का मतलब ऐसे शहरों से है, जहां पानी और बिजली की अच्छी व्यवस्था होगी, इसके साथ ही साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन, शहर में आने जाने के लिए परिवहन का बेहतरीन साधन, नागरिकों की सुरक्षा जैसी कई सुविधाएं मौजूद हों।
लेकिन इनमें से कोई भी व्यवस्था टीएचए में बेहतर नहीं है, जिसके कारण गाजियाबाद के लोगों को चिंता बनी हुई है। फेडरेशन ऑफ एओए के संरक्षक आलोक कुमार ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए सीवर गंदगी, अवैध निर्माण के खिलाफ प्राधिकरण को सख्त होना होगा। तभी अपनी सिटी स्मार्ट बनेगी।