कागजों में तालाब खुदवाकर जिला प्रशासन अपने नंबर बढ़ा रहा है। अधिकारियों का मौके पर जाने की बजाय कागजों में तालाब खोदने का काम चल रहा है। मानसून से पहले गाजियाबाद में 40 तालाब खोदे जाने थे।
मजे की बात तो यह है कि जिला प्रशासन द्वारा सभी तालाब खोदे जाने की बात कही जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। तालाबों की जमीन पर जाकर अधिकारियों ने फावड़ा पकड़ते हुए फोटो खिंचवा लिए, मगर ज्यादातर तालाब आज भी बदहाल स्थिति में हैं।
कहीं तालाबों की खुदाई के लिए जेसीबी मशीन नहीं मिल रही तो कहीं तालाबों की सफाई अब तक नहीं हुई। बावजूद इसके जिला प्रशासन सारे तालाब खोद लेने का दावा कर रहा है।
तालाबों पर मंगलवार को डीएम ने सीडीओ और डीडीओ के साथ समीक्षा भी की। समीक्षा बैठक में सभी तालाब खोद लिए जाने की बात कही गई, जबकि हकीकत यह है कि जो तालाब पहले से ही खुदे हुए थे, केवल उनमें से ही कुछ को साफ किया गया है।
सभी तालाब की सफाई भी नहीं हुई है। तालाबों की सफाई का जिम्मा प्राइवेट संस्था को दिया गया था, जिसकी ओर से अब तक काम नहीं किया गया। वहीं, डासना मसूरी में तालाब की जमीन पर अब तक भी घास उगी हुई है।
यहां ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि जेसीबी न मिलने से तालाब नहीं खोदी जा रही है। इस मामले में डीएम विमल कुमार शर्मा का कहना है कि एक-एक तालाब का सत्यापन कराया जाएगा। खुद भी तालाबों का औचक निरीक्षण करेंगे। कहीं भी लापरवाही मिलती है तो निश्चित रूप से संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।