टीएचए (ट्रांस हिंडन एरिया) अब विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहेगा। नगर निगम के वार्डों की संख्या टीएचए में भी अब पुराने शहर के लगभग करीब पहुंच जाएगी। शहर के कुल 100 वार्डों में 46 वार्ड ट्रांस हिंडन क्षेत्र में होंगे, जबकि परिसीमन से पहले टीएचए में सिर्फ 26 वार्ड हैं।
यानी वार्डों की संख्या बढ़ेगी तो जनप्रतिनिधियों की संख्या और उनके वार्ड कोटे की रकम भी ज्यादा मिलेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में टीएचए में भी विकास की बयार बहेगी।फिलहाल शहर में 80 वार्ड है, इनमें टीएचए में सिर्फ 26 वार्ड हैं।
यानी टीएचए को सिर्फ 26 वार्डों का कोटा विकास के लिए मिल पाता है, जबकि पुराने शहर में 54 वार्डों के कोटे का पैसा विकास कार्यों पर खर्च होता है। यही वजह है कि हिंडन पार क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ था। 2001 की जनगणना के मुताबिक 19 सेक्टरों की वसुंधरा कालोनी को एक वार्ड में शामिल कर दिया गया था।
अब 2017 तक आते-आते वसुंधरा की आबादी दोगुना से भी ज्यादा बढ़ गई थी। ऐसे में एक वार्ड का कोटा वसुंधरा कालोनी के डेवलपमेंट के लिए पर्याप्त नहीं था। अब नए परिसीमन में वसुंधरा कालोनी को चार वार्डों में बांट दिया गया है।
यानी जिस क्षेत्र में पहले एक वार्ड का कोटा मिलता था, अब चार वार्डों का कोटा (चार गुना फंड) मिलेगा। जाहिर है कि विकास कार्य भी पहले से ज्यादा होंगे। यही स्थिति इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी और ब्रज विहार क्षेत्र की रहेगी। यहां भी वार्ड बढ़ जाने से फंड ज्यादा खर्च किया जाएगा।
मोहननगर जोन को सबसे ज्यादा राहत
नए परिसीमन में मोहननगर जोन की कालोनियों में रहने वाले लोगों को भी फायदा होगा। विकास की दृष्टि से यह जोन वसुंधरा जोन से काफी पीछे था। इस जोन में भी अब छह वार्ड बढ़ गए हैं। इस जोन में 18 की बजाय अब 24 वार्ड हो जाएंगे।
यानी जिस क्षेत्र में बीते साल करीब 14 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों पर खर्च किए गए थे, वहीं इस बार इन वार्डों का बजट बढ़कर 19 करोड़ रुपये हो जाएगा।
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कुछ ऐसा होगा कालोनियों में वार्डों का स्वरूप
कालोनी पहले वार्ड प्रस्तावित वार्ड
वसुंधरा 1 4
इंदिरापुरम 3 7
वैशाली 2 3
कौशांबी -- 2
डेल्टा कालोनी 2 3
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विकास को नहीं तरसेंगे झंडापुर, कड़कड़, साहिबाबाद के लोग
वार्ड परिसीमन के प्रपोजल में झंडापुर व साहिबाबाद गांव को मिलाकर एक वार्ड बनाने और कड़कड़ मॉडल व महाराजपुर को मिलाकर दूसरा वार्ड बनाने प्रस्ताव दिया गया है। यानी ग्रामीण आबादी को अलग से वार्ड का दर्जा मिल जाएगा। इससे अब इन गांवों के विकास के लिए पर्याप्त फंड मिलेगा।
पूर्व में इन गांवों को किसी अन्य वार्ड के साथ अटैच किया गया था। इन गांवों को विकास के लिए फंड कम मिल पाता था।