ऊर्जा निगम जोन तीन के मुख्य अभियंता दीपक अग्रवाल ने बताया कि टीएचए में स्मार्ट मीटर लगाने लिए एक निजी कंपनी से अनुबंध किया है। इस अनुबंध के तहत निगम कंपनी को प्रति स्मार्ट मीटर 80 रुपये मासिक भुगतान करेगा। वैसे एक स्मार्ट मीटर लगाने में लगभग चार हजार रुपये की लागत आएगी, लेकिन ये लागत कंपनी ही देगी। उपभोक्ता या ऊर्जा निगम इसका कोई भुगतान नहीं करेगा। कंपनी की जिम्मेदारी होगी कि फीडर, ट्रांसफॉर्मर की स्थापना के साथ-साथ उनकी निगरानी करने से लेकर रीडिंग निकालने तक का काम कंपनी ही कराएगी। इन स्मार्ट मीटर को लगने के बाद उपभोक्ताओं और ऊर्जा निगम दोनों को ही फायदा होगा। मीटर से पता लगाया जाएगा कि कितने समय तक के लिए फीडर बंद रहा है। पूरे दिन का 24 घंटे का डाटा मीटर देगा।
फीडरों की कार्यक्षमता का चलेगा पता
ऊर्जा निगम के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक बिजली कटौती की जानकारी उपभोक्ता की शिकायतों पर निर्भर रहती थी। इससे समस्या के सही स्थान और कारण की पहचान में समय लगता था, लेकिन स्मार्ट मीटर प्रणाली से बेहद आसानी होगी। तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। इस नई व्यवस्था से न सिर्फ बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि ट्रांसफॉर्मर और फीडरों की क्षमता और कार्यक्षमता का पता चलेगा।
तीन चरण में किया जाएगा स्मार्ट मीटर लगाने का काम
स्मार्ट मीटर का काम तीन चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में टीएचए के सभी फीडरों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। इसके बाद फीडर से जुड़े सभी ट्रांसफार्मर पर स्मार्ट मीटर लगेंगे। इसके बाद लोगों के घरों में मीटर को बदला जाएगा। अब तक अहिंसा खंड दो, कोयल एनक्लेव, अंबिका स्टील, लोहिया नगर, सेक्टर 10 वसुंधरा, शालीमार गार्डन एक्सटेंशन एक, वैशाली सेक्टर दो और पटेल नगर व शहरी क्षेत्र के भी एक फीडर पर स्मार्ट मीटर लग चुका है। उनका ट्रायल भी शुरू कर दिया गया है। अभी नौ फीडर का एक-एक दिन ट्रायल करने के बाद डाटा निकाला गया है। सभी ट्रायल सफल हुए हैं।
मुख्य अभियंता दीपक अग्रवाल ने बताया कि इलाके में बिजली कटौती का पता करने के लिए ये मीटर लगाए जा रहे हैं। पहले फीडर इसके बाद ट्रांसफॉर्मर फिर घरों में मीटर लगाने का काम किया जाएगा। जुलाई के अंतिम दिन तक सभी फीडर और ट्रांसफॉर्मर पर मीटर लगा दिए जाएंगे।