गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल में अब चार से पांच घंटे में खून की जांच रिपोर्ट मिलेगी, क्योंकि जांच क्षमता बढ़ाने के लिए पैथोलॉजी लैब में अत्याधुनिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन उपलब्ध कराई गई है। नई मशीन इंस्टाल होने के बाद अब खून के नमूनों की जांच प्रक्रिया और भी तेज हो जाएगी। जल्द ही इस मशीन को लैब में इंस्टॉल कर मरीजों के सैंपलों की जांच शुरू कर दी जाएगी।
अभी तक लैब में चार बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीनों से नमूनों की जांच हो रही है। इनमें एक मशीन में 100 सैंपल और तीन मशीनों में 50-50 सैंपल की जांच एक साथ होती है। सैंपल की जांच पूरी होने में अभी सात से आठ घंटे का समय लग रहा है। नई मशीन के इंस्टॉल हो जाने के बाद यह समय घटकर 4 से 5 घंटे रह जाएगा। इससे न केवल सैंपल का बैकलॉग कम होगा, बल्कि मरीजों को उसी दिन रिपोर्ट भी मिल सकेगी।
पैथोलॉजी लैब के इंचार्ज शैलेंद्र ने बताया कि लैब में आधुनिक मशीन के साथ ही एक आरओ प्लांट भी उपलब्ध कराया गया है, जो मशीन की सुचारु कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है। मशीन इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी और इसके बाद कुछ ही घंटों में 100 सैंपलों की जांच संभव होगी। नई मशीन से ब्लड के 30 विभिन्न प्रकार के टेस्ट किए जा सकते हैं, जिससे जांच का दायरा भी बढ़ेगा।
सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि लैब में पहले से मौजूद एक मशीन में सैंपल जांच में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता था। अब नई मशीन के आने से चार से पांच घंटे में रिपोर्ट तैयार हो सकेगी। इससे मरीजों को इलाज में देरी नहीं होगी और समय पर उपचार शुरू हो सकेगा।
एमएमजी अस्पताल में प्रतिदिन करीब 2100 से 2200 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं और लगभग 100 मरीजों को इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इनमें से औसतन 400 मरीजों को विभिन्न प्रकार की पैथोलॉजिकल जांचों के लिए भेजा जाता है। जांच प्रक्रिया के तेज होने से अस्पताल प्रशासन पर दबाव भी कम होगा।
एनएबीएल सर्टिफिकेशन की तैयारी
पैथोलॉजी लैब अब गुणवत्ता मानकों को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। शैलेंद्र ने बताया कि लैब पहले ही आईएसओ सर्टिफाइड हो चुकी है। अब सटीक और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करने के बाद एनएबीएल (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज) सर्टिफिकेट के लिए भी आवेदन किया जाएगा। इसके अलावा, लैब में जल्द ही हीमोफीलिया और गर्भवती महिलाओं से जुड़ी विशेष जांच सेवाएं भी शुरू की जाएंगी, जिससे मरीजों को और अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी।