गाजियाबाद। जिले की सड़कों पर आपातकालीन सेवा देने वाली सैकड़ों एंबुलेंस खुद अनफिट हैं। आरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 2,000 से अधिक एंबुलेंस में से करीब 800 ने लंबे समय से फिटनेस जांच नहीं कराई है। विभाग ने इन एंबुलेंस के वाहन स्वामियों को नोटिस जारी कर एक माह का समय दिया है। इसके बाद भी फिटनेस नहीं कराने पर एंबुलेंस को सीज करने और पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति करने की तैयारी है।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में पंजीकृत कुल एंबुलेंस में से करीब 40 प्रतिशत ने फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं लिया है। इनमें कई एंबुलेंस निजी अस्पतालों, ट्रस्टों और निजी ऑपरेटरों की हैं। नियमों के मुताबिक, एंबुलेंस में आपातकालीन जीवनरक्षक उपकरण, कार्यशील ऑक्सीजन सिलिंडर और दुरुस्त तकनीकी स्थिति का होना अनिवार्य है। फिटनेस जांच के बिना चलने वाली एंबुलेंस रास्ते में खराब हो सकती हैं या तकनीकी खामी के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
अस्पतालों के बाहर और मुख्य मार्गों पर होगी जांच
आरटीओ प्रवर्तन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि अनफिट एंबुलेंस को पकड़ने के लिए परिवहन विभाग जल्द ही प्रवर्तन टीमों को मैदान में उतारेगा। ये टीमें प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों के बाहर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, जीटी रोड और लिंक रोड पर सघन जांच अभियान चलाएंगी। इस दौरान कागजात के साथ ही एंबुलेंस में मौजूद जीवनरक्षक उपकरणों की भी जांच की जाएगी।