शहर में सड़क, सीवर, नाले निर्माण के कार्यों पर भी नोटों का ब्रेक लगने लगा है। बैंकों से पैसा निकालने में हो रही परेशानी और 1000-500 के नोटों के चलन से बाहर होने से अब ठेकेदार भी लेबर को पैसा नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में मजदूरों ने भी काम छोड़ दिया है। हालात जल्द ही सामान्य नहीं हुए तो निगम के 584 विकास कार्य भी शुरू नहीं हो पाएंगे।
नगर निगम ने अवस्थापना, 14वें वित्त और अन्य मदों से विकास कार्यों को शुरू कराया था। शहर भर में कांट्रैक्टर फर्मों ने इन कार्यों को शुरू कर दिया था, लेकिन अब नोट बंदी की मार से यह बीच में थमने लगे हैं।
संजय नगर के पी-ब्लाक , राजनगर, वसुंधरा में डामर सड़क, ब्रिज विहार में सड़क निर्माण समेत कई स्थानों पर पब्लिक और सामुदायिक शौचालय का निर्माण भी बीच में रुक गया है। ठेकेदारों की मानें तो लेबर को उन्हें कैश में दिहाड़ी का भुगतान करना पड़ता है।
अधिकांश मजदूर दूसरे राज्यों के हैं, उनके न तो बैंक खाते हैं और न ही वह बैंक में पैसा डालने की स्थिति में है। दिन भर में मजदूरी करके जितना पैसा कमाते हैं, उसी से शाम को उनके घर का चूल्हा चलता है। कांट्रैक्टरों के पास जितना कैश था, वह खर्च कर चुके हैं। अब बैंकों में कैश की कमी की वजह से उनका अपना पैसा भी नहीं मिल रहा।
ऐसे में लेबर को पैसा देना मुश्किल हो रहा है। एक सप्ताह से पैसा नहीं मिल रहा तो लेबर ने भी काम छोड़ दिया है। इसकी वजह से शहर में करीब 30 से 40 फीसदी विकास कार्य रुक गए हैं।
नोट बंदी की वजह से लेबर को पैसा दे पाना मुश्किल हो रहा है। कैश की किल्लत लंबी चली तो स्थिति और खराब हो जाएगी। बैंकों से पैसा निकालने की लिमिट बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि लेबर को पैसा दिया जा सके। तभी विकास कार्य करा पाना संभव हो सकेगा। - अजय त्यागी, अध्यक्ष, नगर निगम कांट्रैक्टर संघ।