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नोटबंदी का असर. फैक्ट्रियों से श्रमिकों की होने लगी ‘छुट्टी’

Sat, 03 Dec 2016 10:44 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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श्रमिकों का प्रदर्शन - फोटो : file photo
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नोट बंदी की वजह से अब फैक्ट्रियों से श्रमिकों की छुट्टी होने लगी है। औद्योगिक नगरी गाजियाबाद में उद्यमियों के पास कैश की किल्लत होने की वजह से सूक्ष्म इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों पर असर पड़ रहा है। फैक्ट्री मालिक कैश नहीं होने की वजह से श्रमिकों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं। फैक्ट्रियों के ऑर्डर कैंसल होने के साथ ही नए आर्डर मिलने भी बंद हो गए हैं।
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इसी के चलते मध्यम एवं बड़े उद्योगों में उत्पादन में गिरावट की वजह से दर्जनों फैक्ट्रियों में नाइट शिफ्ट को बंद कर दिया गया है।केंद्र सरकार द्वारा 500 व 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद उद्योगों और श्रमिकों की आजीविका पर पड़ रहा प्रतिकूल असर दिखने लगा है। गाजियाबाद में छोटी-बड़ी कुल मिलाकर 8500 से ज्यादा औद्योगिक इकाईयां हैं।

इनमें करीब पांच लाख श्रमिक काम करते हैं।गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि कुल औद्योगिक इकाइयों में से 30 से 40 प्रतिशत सूक्ष्म इकाइयां हैं, इनमें से अनेक इकाइयों के मालिकों ने श्रमिकाें को लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। कैश न मिलने से करीब 25 हजार श्रमिक काम छोड़कर जा चुके हैं।
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ज्यादातर सूक्ष्म इकाइयों में कैश से ही लेनदेन होता है, कच्चा माल खरीदने और तैयार माल बेचने में भी कैश का प्रयोग किया जाता है। श्रमिकों को भी कैश पेमेंट ही की जाती है, जो नोट बंदी के बाद से संभव नहीं हो पा रहा है। दिसंबर की सात तारीख को फिर सैलरी देनी है। बैंकों के पास कैश नहीं है, ऐसे हालात में श्रमिकों को हम सैलरी भी टुकड़ों में दी जाएगी।
 
बोले उद्यमी
- मसूरी गुलावठी रोड औद्योगिक क्षेत्र में एक  भी बैंक नहीं है, इसलिए अधिकांश फैक्ट्री मालिक  श्रमिकों कोकैश ही देते हैं। यह सही है कि नोट बंदी के बाद से उत्पादन गिरा है और 10 से 15 प्रतिशत श्रमिक भी काम छोड़ कर चले गए हैं। जब तक कैश की कमी रहेगी, तब तक यह परेशानी बनी रहेगी। - एनएन मिश्रा, अध्यक्ष मसूरी गुलावठी रोड औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन

- कैश की किल्लत है। उद्यमियों के पास रोज का कामकाज करने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उत्पादन भी गिरा है। जो इकाइयां जॉब वर्क करती हैं, वहां पर श्रमिकों की कमी हुई है। जब स्थिति संभलेगी तब श्रमिकाें की कमी की समस्या आएगी। - जेपी कौशिक, वरिष्ठ सदस्य आईआईए

- नोट बंदी से उद्योगों पर बुरा प्रभाव पड़ा है। छोटी इकाइयों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। फैक्ट्रियों से छंटनी की बात सही है, क्योंकि जब उद्यमियाें को नुकसान होगा तो वह कहां तक  उसकी भरपाई करेंगे। अभी उद्यमी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। - आरके शर्मा, उद्यमी बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र
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