जीडीए का 36 बिल्डरों पर बाह्य विकास शुल्क के मद में सौ करोड़ से ज्यादा बकाया है। यह बकाया वसूलने के लिए जीडीए ने नोटबंदी का ‘सहारा’ लेते हुए चार दिनों की एक स्कीम चलाई। स्कीम के तहत पांच व हजार के पुराने नोट लेने का प्रलोभन दिया गया था लेकिन सिर्फ एक बिल्डर ने 80 लाख का बकाया भुगतान किया।
जीडीए को इस स्कीम में करोड़ों पाने की उम्मीद थी लेकिन निराशा हाथ लगी।नोट बंदी शुरू होने के दस दिनों बाद जीडीए को इस दौर का फायदा उठाने का ख्याल आया। जीडीए ने 20 नवंबर को घोेषणा की कि 21 से 24 नवंबर तक लोग पुराने नोट से बकाया चुका सकते हैं।
जीडीए के वित्त नियंत्रक टीआर यादव ने सोमवार को बताया कि इस दौरान सिर्फ क्रॉसिंग रिपब्लिक के एक बिल्डर ने 80 लाख का भुगतान किया, वह भी चेक से। इसके अलावा इंदिरापुरम के लोगों ने अनुरक्षण शुल्क के मद में 18 लाख का भुगतान पुराने नोट से किया।करीब 6-7 साल से जीडीए का 36 बिल्डरों पर बकाया है।
इनमें ग्रुप हाउसिंग और लेआउट प्लान के बिल्डर शामिल हैं। नियमानुसार दो साल के अंदर चार किस्तों में बाह्य विकास शुल्क चुकाना होता है। समय से शुल्क न चुकाने पर 15 प्रतिशत ब्याज देना होता है। इस मामले में जीडीए को यह चिंता नहीं है कि उनका पैसा डूब सकता है क्योंकि जीडीए ने इन बिल्डरों से बैंक गारंटी ले रखी है।
फिलहाल जीडीए ब्याज के रूप में मिल रही राशि को अपनी आमदनी मान रहा है।वित्त नियंत्रक ने बताया कि इंदिरापुरम, कर्पूरीपुरम और स्वर्णजयंती पुरम के लोग पानी व सीवर चार्ज के मद में पांच सौ का पुराना नोट 15 दिसंबर तक दे सकते हैं। ये तीनों कॉलोनी जीडीए केतहत आती हैं। इस संदर्भ में जीडीए वीसी ने सोमवार को आदेश जारी किए हैं।