दिवाली पर हुई आतिशबाजी से पीएम-10 (10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास के पार्टिकल) में कई गुना की बढ़ोतरी ने गाजियाबाद को स्मॉग में डुबा दिया है। स्मॉग बढ़ने से न सिर्फ विजिबिलिटी कम हुई है, बल्कि सांस रोगियों और बच्चों के लिए भी खतरा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की मानें तो हवा नहीं चलने से स्मॉग कम नहीं हो रहा है।
इसके कम होने में अभी दो से तीन दिन लगेंगे। साथ ही सूर्य के दर्शन बमुश्किल ही होंगे।दिवाली पर लोगों ने जमकर आतिशबाजी। इसकी वजह से पीएम-10 का लेवल 910 पहुंच गया। नौ गुना प्रदूषण बढ़ने से गाजियाबाद में स्मॉग बढ़ गया है। इसकी वजह से सुबह के समय दृश्यता एक किलोमीटर ही रह गई है।
बृहस्पतिवार को आसमान में धुंध छाई रहने के चलते हल्की धूप निकली। अफसरों मानें तो हवा नहीं चलने के कारण प्रदूषण के कण एक ही जगह रुक गए हैं। अभी तक पीएम-10 का लेवल भी साढे़ आठ सौ से अधिक है। जब तक हवा नहीं चलेगी स्मॉग नहीं छटेगा। इसकी वजह से रविवार तक धूप हल्की ही रहेगी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैज्ञानिक सपना श्रीवास्तव ने बताया कि पीएम-10 बढ़ जाने से आसमान में स्मॉग छाया है। बारिश और हवा चलने पर स्मॉग कम होगा। ऐसा नहीं होता तो एक से दो दिन सुबह के समय धुंध छाई रहेगी।
- धुंध के चलते सांस की रोगी बढ़े
चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो इससे सांस रोगियों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है, जबकि नवजात बच्चों के लिए भी ऐसे वातावरण में सांस लेेना नुकसानदेह है। अस्पताल में एलर्जी के मामले काफी अधिक हो गए हैं। दिवाली के बाद चार दिनों में टीएचए के अस्पतालों में प्लमनॉलोजी डिपार्टमेंट की ओपीडी में श्वास रोगियों की संख्या चार सौ से अधिक पहुंच गई है।
इसमें एलर्जी की शिकायत लेकर लोग पहुंच रहे हैं। प्लमनॉलोजिस्ट डा. केके पांडेय ने बताया कि सांस के रोगी इस वक्त ज्यादा एहतियात बरतें। वह सुबह और शाम घर से नहीं निकले तो अच्छा रहेगा। बच्चों को भी घर में ही रखें।