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Ghaziabad News: वाहनों में नहीं सुरक्षा कवच, खतरे में सफर

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गाड़ी में लगने वाला पैनिक बटन। फाइल फोटो
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गाजियाबाद। नोएडा से दिल्ली जा रही बस में छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में सुरक्षा के लिए अनिवार्य किए गए पैनिक बटन और वीएलटीडी (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) के बिना ही 23,832 व्यावसायिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें करीब 20 हजार ऑटो, कैब, बस और ई-रिक्शा शामिल हैं। ऐसे में सवाल है कि जब सुरक्षा उपकरण ही वाहनों में मौजूद नहीं हैं तो आपात स्थिति में यात्रियों की मदद कैसे होगी?
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जिले में कुल 83,472 व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से 23,832 वाहनों में अब तक वीएलटीडी और पैनिक बटन नहीं लग पाया है। इस लिहाज से करीब हर चौथा व्यावसायिक वाहन सुरक्षा के अनिवार्य इंतजामों के बिना ही सड़कों पर चल रहा है। नियम लागू होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का बिना सुरक्षा उपकरणों के संचालन व्यवस्था की निगरानी और नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है।

नए वाहनों में नियम लागू, पुराने में लापरवाही
व्यावसायिक वाहनों में पैनिक बटन और वीएलटीडी अनिवार्य किए गए हैं। नए वाहनों के लिए यह नियम एक जनवरी 2026 और पुराने वाहनों के लिए एक अप्रैल 2026 से लागू हुआ। नए वाहन इन दोनों सुविधाओं के साथ ही आ रहे हैं, लेकिन पुराने वाहनों में इन्हें अलग से लगवाना होता है। इसके लिए शासन ने कई अधिकृत कंपनियों को जिम्मेदारी दी है। इसके बावजूद हजारों पुराने वाहन अब भी बिना सुरक्षा उपकरणों के चल रहे हैं। महिला अपराध रोकने और आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाने के उद्देश्य से वाहनों में पैनिक बटन व वीएलटीडी की व्यवस्था की गई है, लेकिन सड़कों पर दौड़ रहे हजारों वाहनों में इनका न होना व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल है।
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बटन दबाते ही पहुंचनी चाहिए सूचना
वीएलटीडी के जरिये वाहन की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। इससे पुलिस को किसी घटना के बाद वाहन तक पहुंचने में मदद मिलती है। पैनिक बटन आपात स्थिति में तत्काल सूचना देने के लिए लगाया जाता है। बसों में इसे पिलर के पास, जबकि कैब, ऑटो और ई-रिक्शा में आगे-पीछे की सीटों के बीच ऐसे स्थान पर लगाया जाता है, जहां यात्री आसानी से उसे देख व दबा सके। बटन दबाने पर सूचना आरटीओ विभाग के कमांड कंट्रोल रूम तक पहुंचती है। यहां से पुलिस और वाहन मालिक को सूचना भेजी जाती है। व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि किसी यात्री के मुसीबत में पड़ने पर मदद पहुंचने में देरी न हो, लेकिन जब हजारों वाहन इस व्यवस्था से ही बाहर हैं तो आपातकालीन सुरक्षा का यह पूरा तंत्र सवालों के घेरे में आ जाता है।

रोडवेज बसों में भी आसानी से नजर नहीं आता बटन
सिर्फ निजी वाहन ही सवालों के कठघरे में नहीं हैं। सड़क पर दौड़ने वाली उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की अनुबंधित और सामान्य बसों में भी पैनिक बटन आसानी से नजर नहीं आता। अधिकांश यात्रियों को यह तक पता नहीं होता कि आपात स्थिति में मदद के लिए बटन कहां दबाना है। जिम्मेदारों की ओर से निजी वाहनों में नियमों का पालन कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन में भी व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

जिम्मेदार बोले : बिना उपकरण वाहन मिला तो होगा जब्त
एआरटीओ प्रवर्तन अमित राजन राय ने बताया कि नए नियम के तहत उन्हीं वाहनों की फिटनेस और परमिट जारी किया जा रहा है, जिनमें पैनिक बटन और वीएलटीडी लगा हुआ है। अधिकृत वेंडर से उपकरण लगवाने के बाद उसका रिकॉर्ड आरटीओ में दर्ज किया जाता है। जिन वाहनों में दोनों सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें दूसरे व्यक्ति को बेचने पर भी रोक है। ऐसा कोई वाहन सड़क पर चलता मिला तो उसे जब्त कराया जाएगा।
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