फीस वृद्धि को लेकर प्राइवेट स्कूल सभी विभागों के निशाने पर है। नगर निगम ने भी शनिवार को बोर्ड बैठक में स्कूलों से कामर्शियल टैक्स वसूलने का प्रस्ताव पास कर दिया, लेकिन इसे वसूलना संभव नहीं हो सकेगा। प्रदेश सरकार ने 12 वीं तक के स्कूलों का हाउस टैक्स माफ किया हुआ है।
उन्हें सिर्फ सीवर और वाटर टैक्स देना होता है। ऐसे में स्कूलों से कामर्शियल टैक्स तो क्या, रेजिडेंशियल टैक्स लेने के लिए भी निगम को शासन से नियमों में फेरबदल कराना पड़ेगा।
बीते साल हाउस टैक्स बढ़ोतरी को लेकर शहर में हंगामा हुआ था तो निगम ने पहले भी निजी स्कूलों को रियायत न देने का फैसला कर कामर्शियल टैक्स लगाए जाने का प्रस्ताव पास किया था। यह निगम बोर्ड बैठक की मीनिट्स में भी दर्ज है। निगम बोर्ड ने शुक्रवार को वही फैसला दोहराकर हास्यास्पद स्थिति पैदा कर दी है।
शासनादेश के मुताबिक नगर निगम स्कूलों से हाउस टैक्स नहीं वसूल सकता। उनसे केवल सीवर और वाटर टैक्स वसूली हो सकती है और यह टैक्स सभी स्कूल पहले ही अदा कर रहे हैं। स्कूल कोई कामर्शियल एक्टिविटी नहीं है, बल्कि सोशल एक्टिविटी है। निगम मनमानी करेगा तो उसके लिए विधिक रास्ते भी हैं।
- सुभाष जैन, अध्यक्ष, इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया
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स्कूल पूरी तरह कामर्शियल हो चुके हैं। इनसे कामर्शियल टैक्स वसूलने के लिए अगर मुख्यमंत्री तक जाना पड़ा तो जाएंगे। अगर स्कूल सरकारी विभागों से रियायत ले रहे हैं तो उन्हें अभिभावकों को भी रियायत देनी चाहिए। - अशु वर्मा, महापौर
शहीदों के परिजनों और पूर्व सैनिकों को हाउस टैक्स में छूट देकर नगर निगम ने उनका सम्मान किया है। निगम का यह फैसला स्वागत योग्य है। यह कहना है अशोक चक्र प्राप्त शहीद मेजर मोहित शर्मा के पिता आरके शर्मा का। उनका कहना है कि नगर निगम या उत्तर प्रदेश सरकार को यह निर्णय पहले ही ले लेना चाहिए था।
शहीद मेजर मोहित शर्मा 21 मार्च 2009 को कुपवाड़ा में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। साहिबाबाद के राजेंद्र नगर में उनका परिवार रहता है। उनके पिता आरके शर्मा का कहना है कि अकेले मोहित शर्मा ही नहीं नगर निगम के इस फैसले से हर शहीद और सैनिक के सम्मान में बढ़ोतरी होगी।
हाउस टैक्स की रकम भले ही बड़ी न हो, लेकिन निगम ने उनका सम्मान करके ऐतिहासिक फैसला किया है और यह पूरे प्रदेश में लागू होना चाहिए। उधर, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष व रिटायर्ड कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी का कहना है कि चार साल पहले उन्होंने नगर निगम को यह प्रस्ताव दिया था।
देर से ही सही निगम ने इस प्रस्ताव पर अमल कर सराहनीय निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 50 हजार सैनिक परिवार है। इनमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र में है। नगर निगम सीमा क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों को इस फैसले से फायदा होगा। निगम ने उनका हाउस टैक्स माफ कर ऐतिहासिक फैसला लिया है।