गाजियाबाद। जिला पंचायत क्षेत्र में आपको न तो किसी से ठेका लेने की जरूरत है और न ही कोई लाइसेंस या अनुमति की। आपके पास सिर्फ लोहे का यूनिपोल खड़ा करने के लिए पैसा होना चाहिए। इतना करने पर ही आपको हर महीने लाखों की कमाई हो सकती है। हैरत की बात है कि जिला पंचायत का कोई भी जिम्मेदार आपको रोकने-टोकने भी नहीं आएगा।
यह हम नहीं कहे रहे, बल्कि जिला पंचायत क्षेत्र में विज्ञापन के बड़े बड़े अवैध यूनिपोल इसकी गवाही दे रहे हैं। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी मंजू सिंह और प्रचार प्रभारी गजेंद्र शर्मा खुद यह स्वीकार करते हैं कि मेरठ रोड पर किसी को विज्ञापन का ठेका या अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद वहां करीब 50 यूनिपोल खड़े हैं और उन पर खुलेआम प्रचार किया जा रहा है।
मेरठ रोड से लेकर मुरादनगर और मोदीनगर तक खड़े इन अवैध यूनिपोल पर नामी स्कूलों, बिल्डरों, अस्पतालों और कंपनियों के विज्ञापन लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एक यूनिपोल पर विज्ञापन लगाने के लिए हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इससे लाखों रुपये की कमाई विज्ञापन माफियाओं की जेब में जा रही है, जबकि सरकारी खजाने को एक पैसा नहीं मिल रहा।
हैरानी की बात है कि जिम्मेदार विभागों की आंखों के सामने यह पूरा खेल चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल बयानबाजी हो रही है। इतना ही नहीं, ये अवैध यूनिपोल जनता की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक हैं। मानकों का पालन नहीं होने के कारण ये अवैध यूनिपोल आंधी-बारिश में कब गिर जाएं, कहा नहीं जा सकता।
सीन-1 : 700 मीटर में 15 से ज्यादा यूनिपोल
मेरठ रोड पर दुहाई स्थित ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से आगे जिला पंचायत क्षेत्र शुरू होता है, जो सैंथली गेट तक फैला है। करीब 700 मीटर की इस दूरी में ही 15 से अधिक यूनिपोल खड़े हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि अलग-अलग माफियाओं ने लगाए हैं।
सीन-2 : मुरादनगर और मोदीनगर में भी कब्जा
मुरादनगर में गंगनहर पुल से एसआरएम इंस्टीट्यूट तक करीब ढाई किलोमीटर और मोदीनगर में तहसील से कादराबाद तक करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में 35 से ज्यादा यूनिपोल लगे हुए हैं। इन पर बड़े अस्पतालों, बिल्डरों और कंपनियों के विज्ञापन दिखाई देते हैं। कई बार विज्ञापन हटाने और कब्जे को लेकर माफियाओं के बीच तनाव की स्थिति भी बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्चस्व की यह लड़ाई कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है।
जिम्मेदार बोले
मैं फिर कह रहा हूं कि मेरठ रोड पर प्रचार करने के लिए हमने किसी को कोई एनओसी नहीं दी है। हम इसके लिए संबंधित विभागों को भी लिख रहे हैं। इस तरह का अनुचित कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
-रामराजा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
मेरठ रोड पर प्रचार करने के लिए न हमने कोई लाइसेंस दिया है और ही कोई ठेका। अब मामला जानकारी में आया है, इसकी जांच कराई जाएगी।
-मंजू सिंह, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत गाजियाबाद
लूट की खुली छूट
पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि पूरे मामले में किसी स्तर पर निगरानी नहीं है। नगर निगम क्षेत्र में भी लोक निर्माण विभाग की जमीन पर बिना अनुमति यूनिपोल खड़े कर दिए गए और अब जिला पंचायत क्षेत्र में भी वही स्थिति बन गई है। उनका कहना है कि अधिकांश यूनिपोल के लिए न तो पीडब्ल्यूडी से एनओसी ली गई और न ही कोई वैध अनुमति। इसके बावजूद कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है।
अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कर रहे कार्य
पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल ने नगर निगम अधिकारियों और मेरठ मंडलायुक्त से शिकायत की है कि नगर निगम क्षेत्र की विज्ञापन एजेंसी 24x7 मीडिया सड़क पर चल रहे प्रचार वाहनों को रोककर उनसे भी वसूली कर रही है, जबकि एजेंसी के पास केवल यूनिपोल पर विज्ञापन का ठेका है। वाहनों से प्रचार की कोई अनुमति नहीं है। कई बार इसको लेकर विवाद भी हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में एक कंपनी की प्रचार गाड़ी रोककर कर्मचारियों को बंधक तक बना लिया गया था। इस संबंध में 24×7 मीडिया के प्रबंधक दीपांशु का कहना है कि उनकी एजेंसी निगम से हुए अनुबंध के अनुसार ही काम कर रही है। वहीं, नगर निगम के अधिकारी इस बारे में खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। नगर आयुक्त के सहायक आलोक कुमार का कहना है कि वह इस मसले को नगर आयुक्त और अन्य अधिकारियोंं के समक्ष रखेंगे।