नोटबंदी ने लोगों को एक ओर बैंकों व एटीएम की कतार में लगा दिया है। दूसरी ओर फैसले की मार छोटे व्यापारियों पर सबसे ज्यादा पड़ रही है। नोटबंदी के फैसले से छोटे व्यापारियों और दुकानदारों का व्यापार लगभग ठप हो गया है।
किराना स्टोर, कपड़ा, स्टेशनरी, इलेक्ट्रिकल सहित छोटे-छोटे व्यापारियों की दुकानदारी 60 से 80 फीसदी तक गिर गई है। बाजार में 50, 100 के साथ 500 के नए नोटों का फ्लो लगभग न के बराबर होने से व्यापारी काफी परेशान हैं। ग्राहकों के इंतजार में दुकानदार दिन पर हाथ पर हाथ धरे रहे जाते हैं।
कैश नहीं मिलने से होल सेलरों ने भी माल देने से इंकार कर दिया है। धोखाधड़ी और जानकारी के अभाव में छोटे व्यापारी कैशलेस ट्रांजेक्शन से परहेज कर रहे हैं। पेटीएम का उपयोग भी न के बराबर है।
काउंटर सेल खत्म, सीमित मात्रा में खरीद रहे लोग सामान
1. चंद्रपुर में रहने वाले किराना व्यापारी अमित गुप्ता का कहना है कि नोटबंदी के बाद काउंटर सेल 40 से 50 फीसदी घट गई है। लोग घर पर भी किराना का सामान काफी सीमित मात्रा में मंगा रहे हैं। दूसरी ओर बगैर कैश के पीछे से सामान नहीं मिल रहा है। इस लिए आधा माल मंगा रहे हैं। बैंक से कैश की जगह रेजगारी दी जा रही है।
4. सिहानी गेट बाजार में कन्फेक्शनरी शॉप संचालक प्रवीन कुमार ने बताया कि दुकानदारी लगभग ठप पड़ी हुई है। कैश की कमी और रेजगारी ही मिलने से परेशानी हो रही है। बगैर कैश के डिस्ट्रिब्यूटर्स माल नहीं दे रहे हैं। 100 व 200 रुपये की फुटकर दुकानदारी में 2000 के नोट का खुला नहीं होने से ग्राहकों को लौटाना पड़ रहा है।
पिट गया शादी का सीजन, अब खर्चा भी नहीं निकल रहा
1. घंटाघर पर कपड़ा व्यापारी अनिल कुमार अग्रवाल ने कहा कि नोटबंदी ने शादी का सीजन पीट कर रख दिया। अब केवल 20 फीसदी ही दुकानदारी मुश्किल से हो पा रही है। ग्राहक 2000 रुपए देते हैं, मजबूरी से उन्हें निराश करना पड़ा है। निर्णय काफी गलत समय पर लिया गया।
2. सिहानी गेट में होजरी गारमेंट व्यापारी ऋषिकांत गौड़ कहते हैं कि बाजार में ग्राहक है नहीं, और खुले की समस्या होने से बाकी भी लौट जाते हैं। दिनभर में मुश्किल से 500-1000 रुपये की सेल हो पा रही है। शादी का सीजन भी मंदा चला गया। कैशलेस ट्रांजेक्शन में फ्रॉड होने की संभावना से अभी स्वाइप मशीन के लिए एप्लाई नहीं किया है।
ग्राहक नहीं, माल हुआ महंगा, कैसे चले काम
1. गांधीनगर में इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी दिपिन सिंह भाटिया ने बताया कि नोटबंदी के बाद से काम केवल 25 फीसदी बचा है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। इलेक्टॉनिक्स माल भी महंगा आ रहा है। पहले उधार माल भी मिल जाता था, अब कैश के बिना सामान नहीं मिल रहा है। पेटीएम को लेकर लोगों में डर है, इसलिए मामूली ट्रांजेक्शन हो रहा है।
2. गांधीनगर में इलेक्ट्रिकल शॉप संचालक परमानंद आहूजा कहते हैं कि काम धंधा चौपट हो चुका है। पैसा आएगा तभी तो सामान खरीद सकेंगे। धांधली की आशंका के चलते पेटीएम व अन्य सुविधाओं से किनारा किया हुआ है। 20 फीसदी भी दुकानदारी नहीं बची है।
कैश की जगह रेजगारी के लगे ढेर, मुसीबत
1. गांधीनगर में स्टेशनरी व्यापारी रविभूषण गर्ग का कहना है कि बाजार में कैश फ्लो न के बराबर है। सेल 40 फीसदी तक रह गई है। बड़े नोटों की जगह सिक्कों की भरमार हो चुकी है। माल खरीदने के लिए कैश की डिमांड पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
2. सिहानी गेट बाजार में पान विक्रेता अनिल कुमार भारद्वाज का कहना है कि दुकानदारी में 60 फीसदी की गिरावट आई है। 50, 100 व 500 के नोट की जगह रेजगारी मिलने से ढेर लग गया है। थोक विक्रेता कैश के बिना माल नहीं दे रहे, कैसे काम चलाएं।
3. जीटी रोड पर होटल संचालक अरविंद सिंह ने कहा कि सेल पर 30 फीसदी तक असर पड़ा है। 10 के सिक्के ज्यादा आ रहे हैं। कड़े फैसले से फिलहाल तो परेशानी है, लेकिन हालत जल्द सुधरेंगे। स्वाइप मशीन के लिए एप्लाई किया है।
विंडो शॉपिंग हुई बंद, मॉल्स-बड़ी दुकानें ही सहारा
1. नेहरूनगर निवासी चारू अग्रवाल का कहना है कि कैश की कमी के चलते विंडो शॉपिंग लगभग खत्म हो गयी है। सामान सोच समझकर खरीदना पड़ रहा है। कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए मॉल्स व बड़ी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत जरूरी खर्चों व बकाया के भुगतान को लेकर है।
2. गांधीनगर में रहने वाले लक्ष्मी नारायण का कहना है कि नोटबंदी के बाद से खर्चा चलाना भी मुश्किल हो रहा है। कॉस्मेटिक की दुकान में सेल 20 प्रतिशत रह गई है। खुले पैसे न होने से आने वाले ग्राहकों को भी लौटाना पड़ रहा है।
पेटीएम व कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर डर
कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के भले कितने प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन छोटे दुकानदारों के मन में कैशलेस लेनदेन को लेकर डर बना हुआ है। कई व्यापारियों ने तो स्वाइप मशीन के लिए आवेदन किया है।
लेकिन धोखाधड़ी की संभावना से ज्यादातर दुकानदार परहेज कर रहे हैं। दूसरी ओर पेटीएम के जरिए पैसा खाते में जाने और उसको कैश कराने के लिए बैंकों की लाइनों में लगने के भय से भी लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन से बच रहे हैं।