नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी विकास व अन्य की सजा को लेकर बहस पूरी हो गई। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने विकास, विशाल यादव और सुखदेव की दोषसिद्धि पर तो पहले ही अपनी मुहर लगा दी थी लेकिन कोर्ट उनकी सजा को लेकर बहस सुनने को तैयार हो गई थी।
मालूम हो कि दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों की दोषी ठहराते हुए विकास व विशाल यादव को 30-30 वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। मामले में सुखदेव पहलवान को 25 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है। बहस के दौरान विकास की ओर से दलील रखी गई कि हत्या के मामले में दोषी के लिए या तो उम्रकैद या फांसी की सजा का प्रावधान है। उम्रकैद का मतलब उम्रकैद होता है।
ऐसे में अदालत दोषी को नियत अवधि के लिए सजा कैसे सुना सकती है। सजा में छूट देने का अधिकार कार्यपालिका के पास है, अदालत कार्यपालिका से यह अधिकार कैसे छीन सकती है। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्धारित कर चुकी है कि नियत समय के लिए सजा सुनाई जा सकती है।
नीतीश कटारा हत्याकांड
17 फरवरी 2002 को अपहरण कर नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बुलंदशहर जिले के खुर्जा से नीतीश का शव मिला था। 23 फरवरी 2002 को विकास और विशाल को मध्यप्रदेश के डाबरा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था।